Anant Chaturdashi 2024 Date: कब है अनंत चतुर्दशी? उस दिन होगा गणेश विसर्जन, जान लें तारीख, मुहूर्त और महत्व

Anant Chaturdashi 2024 Date: अनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। जो कि गणेशोत्सव के समापन का प्रतीक होता है। इसी दिन गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाता है। इसके अलावा यह दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के लिए समर्पित है। इस साल अनंत चतुर्दशी 22 सितंबर को मनाई जाएगी।

Anant Chaturdashi 2024 Date: कब है अनंत चतुर्दशी? उस दिन होगा गणेश विसर्जन, जान लें तारीख, मुहूर्त और महत्व
Anant Chaturdashi 2024 Date: अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन त्योहार है, जिसे विशेष रूप से गणेश भक्तों द्वारा बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। जो कि गणेशोत्सव के समापन का प्रतीक होता है। इसी दिन गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाता है। इसके अलावा यह दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के लिए समर्पित है। इस साल अनंत चतुर्दशी 22 सितंबर को मनाई जाएगी।
विसर्जन का मुहूर्त
गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त 22 सितंबर को सुबह 9:00 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। यह समय गणपति बप्पा के विसर्जन के लिए सबसे शुभ माना जा रहा है।
गणेश विसर्जन का महत्व
गणेश विसर्जन के पीछे का भाव है कि भगवान गणेश अपने भक्तों के दुखों और कष्टों को लेकर जल में प्रवाहित हो जाते हैं। विसर्जन का यह अनुष्ठान हमें जीवन के चक्र, यानी सृष्टि और विलय की याद दिलाता है। गणपति विसर्जन के दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के नारों के साथ भक्तजन भगवान गणेश को विदाई देते हैं। यह विदाई आंसुओं से भरी होती है, लेकिन दिल में अगले वर्ष के आगमन की आशा भी बनी रहती है।
अनंत चतुर्दशी को भगवान विष्णु और भगवान गणेश दोनों की पूजा का दिन कहा गया है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा भी की जाती है।
अनंत चतुर्दशी की पौराणिक कथा
अनंत चतुर्दशी के पीछे मुख्य कथा भगवान विष्णु और उनके भक्तों से जुड़ी हुई है। पुराणों के अनुसार, एक बार सतयुग में एक ऋषि के पुत्र कौंडिन्य और उनकी पत्नी सुषेणा रहते थे। कौंडिन्य का जीवन अचानक समस्याओं से घिर गया और उनका सारा धन नष्ट हो गया। तब सुषेणा ने अपने पति को भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करने का सुझाव दिया, जिसमें अनंत सूत्र यानी धागा बांधने की परंपरा शामिल थी।
सुषेणा ने कौंडिन्य को बताया कि अनंत चतुर्दशी के दिन अनंत भगवान की पूजा करने से उनके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। कौंडिन्य ने अनंत चतुर्दशी का व्रत किया और भगवान विष्णु की पूजा की, अनंत सूत्र बांधा, और धीरे-धीरे उनका सारा कष्ट समाप्त हो गया। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी संकट दूर होते हैं और उसे सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
अनंत सूत्र का महत्व:
अनंत चतुर्दशी के दिन अनंत सूत्र को बांधने की परंपरा का विशेष महत्व है। अनंत सूत्र 14 गांठों वाला एक धागा होता है जिसे भगवान विष्णु के अनंत रूप का प्रतीक माना जाता है। इसे बाएं हाथ में बांधने से महिलाओं को और दाएं हाथ में बांधने से पुरुषों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।



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