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सेना के इस खतरनाक साथी से कांपा दुश्मन का कलेजा, पल भर में कर सकता है सफ़ाया

15 जनवरी को पुणे में सेना दिवस मनाया जाएगा. यह पहली बार है, जब पुणे में यह आयोजन होगा. इन दिन होने वाली सेना दिवस परेड में 'रोबोटिक डॉग' खास आकर्षण होंगे. इन क्वाड्रिपैडल अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल्स (QUGV) को भविष्य की सैन्य टेक्नोलॉजी के तौर पर देखा जा रहा है

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12 Jan 2025
( Updated: 08 Dec 2025
07:19 PM )
सेना के इस खतरनाक साथी से कांपा दुश्मन का कलेजा, पल भर में कर सकता है सफ़ाया
देखा आपने। एक बार नहीं बार बार देखिए।ये है नए भारत की नई सेना। जिसके आगे टिक पाना दुश्मनों के लिए मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।जोशीले और जांबाज़ जवानों से लैस भारतीय सेना अब अत्यंत आधुनिक भी हो रही है। चार पैर। मेटल बॉडी। और जानवर जैसी रफ़्तार। ना सिर है। ना आंखें। है तो बस स्क्रू ड्राइवर से कसा हुआ हर एक अंग। ये है भारतीय सेना का नया साथी। दुश्मनों का काल। नाम है । दिन बा दिन भारतीय सेना खुद को और ज़्यादा मज़बूत करने में लगी है। ख़तरनाक और अत्याधुनिक हथियार सेना की शान भी बढ़ा रहे हैं। बदलते भारत की एक तस्वीर ये भी है।जिसमें सेना के जवानों के साथ क़दमताल कर आगे बढ़ते हुए ये। दुश्मनों का कलेजा कंपा देने के लिए काफ़ी है।15 जनवरी को पुणे में सेना दिवस मनाया जाएगा। जिसमें थल सेना अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेगी।इन दिन होने वाली सेना दिवस परेड में 'रोबोटिक डॉग' खास आकर्षण होंगे।इन क्वाड्रिपैडल अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल्स (QUGV) को भविष्य की सैन्य टेक्नोलॉजी के तौर पर देखा जा रहा है और ये सेना के कई काम आसान कर देंगे। सेना दिवस पर परेड से पहले रिहर्सल में ये रोबोट डॉग का दस्त जैसे जैसे मार्च करते हुए आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे आत्मनिर्भर भारत की एक नई तस्वीर भी मज़बूती से दुनिया के सामने आ रही थी। इस रोबोट डॉग की 100 यूनिट को भारतीय सेना में शामिल किया गया है।इनकी तकनीकी खासियतों के बारे में बात करें तो।


रोबोटिक डॉग की खासियत 

देखने में कुत्ते जैसा लगता है, वजन करीब 51 किलो है और लंबाई 27 इंच है। मात्र 1 घंटे में ये चार्ज होकर 10 घंटे तक काम करने की क्षमता रखता है। कैमरे और सेंसर से लैस है। दुश्मन पर गोलीबारी भी कर सकता है। - 40 से +55 डिग्री सेल्सियस तापमान में काम करने में सक्षम। इन्हें असेंबल करने में महज 15 मिनट का समय लगता है।अधिकतम 12 किलोमीटर पेलोड क्षमता वाले इस MULE का स्टैंडबाय रनटाइम 20 घंटे है। पहाड़ियों पर चढ़ने और 12 KG का भार उठाने की क्षमता है। म्यूल डॉग 1 मीटर से 10 किमी की रेंज तक ऑपरेट किया जा सकता है। वाई-फाई या लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन यानी LTE पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।छोटी दूरी के लिए, WI-FI का उपयोग किया जा सकता है, जबकि 4जी/LTE का उपयोग 10 किमी तक की दूरी के लिए किया जा सकता है।

पाकिस्तान और चीन की भी हालत पतली कर देने वाले इस ख़तरनाक हथियार ने भारतीय सेना की शान बढ़ाई है।बदलते भारत के इस एडवांस्ड सेन्य रोबोट को जिसने भी देखा वो हैरान रह गया। जंगल में या फिर पहाड़ी इलाक़ों में देश के दुश्मनों का सफ़ाया करना हो तो सेना के जवानों से पहले ये रोबोट डॉग जाकर रेकी करेंगे। पूरी तरह से आत्मनिर्भर भारत की झलक को दिखाता हुआ ये रोबोट डॉग म्यूल भारत में ही बना है। इसलिए अगर इसमें कुछ ख़ामी भी आती है तो वो भारत में ही ठीक होगी। इस सुपर हिट रोबोट डॉग ने एक अलग पहचान बनाई है। पिछले कुछ सालों में जिस तरीक़े से MAKE IN INDIA के तहत भारतीय सेना ने ख़तरनाक हथियारों को भारत में बनाकर तैयार किया है उससे ये साफ़ होता है कि सेना ख़ुद को आत्मनिर्भर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। और ये ROBOTIC DOG MULE इसका सबसे ताज़ा उदाहरण हैं।

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