Agni - 5 Missile की ये हैं खासियत, नाम सुन कांप उठते हैं दुश्मन

चीन और पाकिस्तान जैसे चालाक और गलत नियत रखने वाले देशों को काबू में रखने के लिए।भारत खुद को मजबूत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा और इस कड़ी में भारत ने इसी साल भारत ने अपनी पहली इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण कर लिया था अब जानिए इसकी खासियत

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07 Sep 2024
( Updated: 09 Dec 2025
04:25 PM )
Agni - 5 Missile की ये हैं खासियत, नाम सुन कांप उठते हैं दुश्मन

चीन और पाकिस्तान जैसे चालाक देशों को काबू में रखने के लिए भारत खुद को मजबूत बना रहा है। इस दिशा में भारत ने इस साल अपनी पहली इंटरकॉंटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया है। अग्नि-5 को मिशन दिव्यास्त्र के तहत तैयार किया गया है, जो एक अत्यंत शक्तिशाली और विनाशकारी हथियार है। अग्नि-5 की रेंज 5000 किमी है और इसमें मल्टिपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक है, जिससे इसे एक साथ कई टारगेट्स पर लॉन्च किया जा सकता है। इसका पहला परीक्षण अप्रैल 2012 में हुआ था, और इस साल इसका MIRV तकनीक के साथ परीक्षण किया गया है।

अग्नि-5 की खासियत:

  • अग्नि-5 मिसाइल भारत की पहली और एकमात्र इंटरकॉंटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है, जो सरफेस टू सरफेस मार कर सकती है।
  • यह 5000 किमी से ज्यादा दूरी तक वार कर सकती है। इसके रेंज में पूरा चीन और यूरोप तथा अफ्रीका के कुछ हिस्से शामिल हैं।
  • यह MIRV तकनीक से लैस है, जिससे एक साथ कई टारगेट्स पर हमला किया जा सकता है।
  • यह मिसाइल डेढ़ टन तक न्यूक्लियर हथियार ले जा सकती है और इसकी स्पीड मैक 24 है, यानी आवाज की स्पीड से 24 गुना ज्यादा।
  • इसके लॉन्चिंग सिस्टम में कैनिस्टर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसे कहीं भी आसानी से ट्रांसपोर्ट और तैनात किया जा सकता है।
  • वर्तमान में भारत के अलावा दुनिया के सिर्फ आठ देशों के पास इंटरकॉंटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) हैं, जिनमें रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस, इजराइल, ब्रिटेन, भारत और उत्तर कोरिया शामिल हैं।

अग्नि मिसाइलों की रेंज:

मिसाइल रेंज (किमी में) पहला टेस्ट

  • अग्नि 1 700 22 मई 1989
  • अग्नि 2 2000 11 अप्रैल 1999
  • अग्नि 3 3000 9 जुलाई 2006
  • अग्नि 4 4000 10 दिसंबर 2010
  • अग्नि 5 5000 19 अप्रैल 2012

तो देखा आपने, भारत समय के साथ अपनी क्षमताओं को बढ़ा रहा है। भारत जानता है कि सिर्फ सेना की संख्या बढ़ाने से काम नहीं चलेगा; सेना को शक्तिशाली हथियार देने होंगे ताकि उसे मजबूत बनाया जा सके।

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