रेलवे भर्ती परीक्षाओं में बदला नियम, अब पगड़ी, बिंदी पहनकर भी दे सकेंगे एग्जाम

रेलवे द्वारा धार्मिक प्रतीकों की अनुमति देने का फैसला एक बड़ा कदम है, जो हमारे लोकतंत्र के मूल्यों धर्मनिरपेक्षता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता का सच्चा उदाहरण है. यह पहल न सिर्फ उम्मीदवारों की आस्था का सम्मान करती है, बल्कि यह सुनिश्चित करती है कि भर्ती प्रक्रिया हर तरह से निष्पक्ष, सुरक्षित और सभी के लिए समान अवसर प्रदान करने वाली हो.

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14 Jul 2025
( Updated: 10 Dec 2025
06:12 PM )
रेलवे भर्ती परीक्षाओं में बदला नियम, अब पगड़ी, बिंदी पहनकर भी दे सकेंगे एग्जाम

Railway Exam Dress Code: रेलवे भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा एक ऐतिहासिक और अहम फैसला लिया गया है, जो उम्मीदवारों की धार्मिक आस्था और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करता है. अब परीक्षार्थी परीक्षा के दौरान पगड़ी, बिंदी और अन्य धार्मिक प्रतीकों को पहन सकेंगे. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बदलाव को ‘सेक्युलर गाइडलाइन’ यानी धर्मनिरपेक्ष दिशा-निर्देश का नाम दिया है. यह कदम न सिर्फ उम्मीदवारों की धार्मिक स्वतंत्रता को संरक्षित करता है, बल्कि परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को भी पूरी तरह कायम रखता है.

अब तक क्या थी स्थिति?

अब तक रेलवे की परीक्षाओं में किसी भी प्रकार के धार्मिक प्रतीक पहनने पर रोक थी. इस कारण से सिख, मुस्लिम, हिंदू और अन्य धर्मों के कई अभ्यर्थियों को असुविधा का सामना करना पड़ता था. कई बार परीक्षा केंद्रों पर इस मुद्दे को लेकर विवाद की स्थिति भी बन जाती थी. धार्मिक प्रतीकों को हटाने की मांग पर भावनात्मक टकराव उत्पन्न होता था, जिससे शांतिपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया पर असर पड़ता था.

आस्था और पारदर्शिता का संतुलन

रेलवे द्वारा घोषित नए नियम के तहत अब धार्मिक प्रतीकों को परीक्षा के दौरान पहनने की पूरी अनुमति होगी, जब तक वे परीक्षा की गोपनीयता या निष्पक्षता में कोई बाधा न बनें। यह फैसला भारतीय संविधान में मिले धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के अनुरूप लिया गया है.

सुरक्षा और पारदर्शिता से नहीं होगा समझौता

धार्मिक प्रतीकों की अनुमति के साथ-साथ रेलवे ने भरोसा दिलाया है कि परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा पहले जैसी सख्त बनी रहेगी. इसके लिए अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है, जैसे:

आधार-बेस्ड फेस रिकॉग्निशन सिस्टम
फोटो वैलिडेशन टेक्नोलॉजी
मोबाइल जैमर की व्यवस्था

इसका प्रमाण यह है कि जून 2025 में हुई परीक्षा में एक भी नकल का मामला सामने नहीं आया, जो कि रेलवे की चाक-चौबंद व्यवस्था की सफलता को दर्शाता है.

भर्ती प्रक्रिया में संवेदनशीलता और तकनीकी सुधार

रेलवे न केवल परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बना रहा है, बल्कि इसे तकनीकी रूप से उन्नत और मानवीय दृष्टिकोण से भी बेहतर किया गया है। हाल ही में जो सुधार किए गए हैं, वे इस प्रकार हैं:

1.वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) की सुविधा, जिससे उम्मीदवारों को बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ेगा.

2. दिव्यांगजनों के लिए ऑडियो-सहायता वाली वेबसाइट, जिससे वे भी डिजिटल रूप से परीक्षा से जुड़ सकें.

3. प्रश्नों की समीक्षा विशेषज्ञों और अनुभवी अनुवादकों द्वारा, ताकि अनुवाद की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके.

4. CBAT (Computer Based Aptitude Test) और टैबलेट आधारित परीक्षा व्यवस्था, जिससे समय की बचत और पारदर्शिता बनी रहती है.

रेल मंत्री की निगरानी में हुए बदलाव

इन सभी बदलावों के पीछे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की सीधी निगरानी और नेतृत्व रहा है. उन्होंने अधिकारियों, उम्मीदवारों, कोचिंग संस्थानों और विशेषज्ञों से फीडबैक लेकर यह सुनिश्चित किया कि भर्ती प्रक्रिया न सिर्फ पारदर्शी और तकनीकी रूप से मज़बूत, बल्कि समयबद्ध और मानवीय दृष्टिकोण से संवेदनशील भी हो.

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रेलवे द्वारा धार्मिक प्रतीकों की अनुमति देने का फैसला एक बड़ा कदम है, जो हमारे लोकतंत्र के मूल्यों धर्मनिरपेक्षता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता का सच्चा उदाहरण है. यह पहल न सिर्फ उम्मीदवारों की आस्था का सम्मान करती है, बल्कि यह सुनिश्चित करती है कि भर्ती प्रक्रिया हर तरह से निष्पक्ष, सुरक्षित और सभी के लिए समान अवसर प्रदान करने वाली हो.

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