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डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से क्यों हिल गई भारत की अर्थव्यवस्था?, एक झटके में अरबपति बन गए 'गरीब'

एक दिन की शेयर बाजार की गिरावट ने देश के सबसे अमीर उद्योगपतियों की नींद उड़ा दी। अडानी, अंबानी, दमानी से लेकर सावित्री जिंदल और शिव नादर तक – सभी की संपत्ति में अरबों डॉलर की कटौती हो गई। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 180 देशों पर टैरिफ बढ़ाए जाने से शेयर बाजार में भारी बिकवाली हुई, जिसका असर भारत के टॉप अरबपतियों पर सबसे ज्यादा पड़ा।

डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से क्यों हिल गई भारत की अर्थव्यवस्था?, एक झटके में अरबपति बन गए 'गरीब'
सोमवार की सुबह जब देश के आम निवेशक रोज़ की तरह शेयर मार्केट के खुलने का इंतज़ार कर रहे थे, तब शायद ही किसी को अंदाज़ा था कि आज का दिन इतिहास में दर्ज हो जाएगा – एक ऐसी काली सुबह के रूप में, जब देश के अरबपति भी कुछ घंटों में "गरीब" कहलाने लगे।

शेयर बाजार की हलचल आम बात है, लेकिन इस बार जो गिरावट आई, उसने तो सबका दिल बैठा दिया। सेंसेक्स करीब 3000 अंक टूटा और निफ्टी भी 900 अंक से ज्यादा गिर गया। जब बाजार बंद हुआ तो निफ्टी 3.24% टूटकर 22,161.60 पर और सेंसेक्स 2.95% गिरकर 73,137.90 पर आ चुका था। यह सिर्फ आंकड़े नहीं थे, यह उन सपनों का टूटना था जो अरबों डॉलर के साथ उड़ रहे थे।

ट्रंप का ट्रैप 180 देशों के खिलाफ बढ़ा टैरिफ

इस बार कहानी सिर्फ भारत की नहीं थी, इसका सिरा अमेरिका से जुड़ा था। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 180 देशों पर टैरिफ यानी आयात शुल्क बढ़ा दिए। इस कदम से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था थर्रा गई। अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अनिश्चितता छा गई और उसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। विदेशी निवेशकों ने डर के मारे भारी मात्रा में शेयर बेच डाले, जिससे भारत में बिकवाली का तूफ़ान आ गया।

इस गिरावट का सबसे बड़ा असर देश के सबसे अमीर लोगों पर पड़ा। फोर्ब्स की रियल-टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार, भारत के टॉप अरबपतियों की संपत्ति में एक ही दिन में कुल 10.3 बिलियन डॉलर (यानी करीब 86,000 करोड़ रुपये) की गिरावट दर्ज की गई।

अंबानी का झटका: 3.6 बिलियन डॉलर की उड़ान गिरी
मुकेश अंबानी – रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक और देश के सबसे अमीर इंसान। लेकिन इस सोमवार की गिरावट ने उन्हें भी नहीं बख्शा। उनकी संपत्ति 3.6 बिलियन डॉलर घटकर 87.7 बिलियन डॉलर पर आ गई। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जो आदमी पिछले महीने तक 100 बिलियन डॉलर क्लब में शामिल था, वो अचानक इतनी बड़ी गिरावट में फंस जाएगा।

अडानी की हालत और खराब: 3 बिलियन डॉलर का नुकसान
गौतम अडानी की कहानी तो और भी दिलचस्प है। हिंडनबर्ग रिपोर्ट से पहले जो आदमी एशिया का सबसे अमीर था, वो अब लगातार गिरती संपत्ति से जूझ रहा है। सोमवार को उनकी संपत्ति में 3 बिलियन डॉलर की गिरावट हुई और अब उनका नेटवर्थ घटकर 57.3 बिलियन डॉलर रह गया है। लोग अब कहने लगे हैं – “अडानी की गाड़ी फिर से रिवर्स गियर में है।”

सावित्री जिंदल: महिला ताकत भी हुई कमजोर
जिंदल ग्रुप की चेयरपर्सन सावित्री जिंदल और उनके परिवार की संपत्ति भी 2.2 बिलियन डॉलर घट गई। अब उनकी कुल संपत्ति 33.9 बिलियन डॉलर पर आ गई है। उनके लिए यह एक बड़ा झटका था क्योंकि वे देश की सबसे अमीर महिला मानी जाती हैं। इस गिरावट ने उनके कारोबारी साम्राज्य को भी हिला दिया है।

शिव नादर: टेक्नोलॉजी के दिग्गज की संपत्ति भी डगमगाई
HCL के संस्थापक शिव नादर की संपत्ति में भी 1.5 बिलियन डॉलर की गिरावट आई और अब उनका नेटवर्थ 30.9 बिलियन डॉलर रह गया है। एक समय था जब उनकी कंपनी भारतीय आईटी सेक्टर की शान थी, लेकिन इस मंदी ने उनको भी बैकफुट पर ला खड़ा किया।

दवा कंपनी सन फार्मा के मालिक दिलीप शांघवी की संपत्ति में भी 819 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज हुई है और अब वे 26.1 बिलियन डॉलर पर हैं। कुमार मंगलम बिड़ला की संपत्ति में 861 मिलियन डॉलर की कमी आई है, जिससे उनका नेटवर्थ 20.4 बिलियन डॉलर रह गया है। टीकाकरण से जुड़े साइरस पूनावाला, जिनका नाम महामारी के दौरान चमका था, उनकी संपत्ति में 39 बिलियन डॉलर की गिरावट देखी गई और अब उनका नेटवर्थ 23.8 बिलियन डॉलर रह गया है।

राधाकिशन दमानी: DMart वाले भी नहीं बचे
DMart के संस्थापक राधाकिशन दमानी की छवि एक शांत अरबपति की है, लेकिन शेयर बाजार का तूफान उन्हें भी बहा ले गया। उनकी संपत्ति में 335 मिलियन डॉलर की गिरावट हुई और अब वह 17.2 बिलियन डॉलर पर टिके हैं।

क्या यह सिर्फ शुरुआत है?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये गिरावट सिर्फ एक शुरुआत है? क्या आने वाले दिनों में और बड़ा आर्थिक संकट दस्तक देने वाला है? वित्तीय जानकारों का मानना है कि ग्लोबल अनिश्चितता, अमेरिका की आक्रामक नीतियाँ और विदेशी निवेशकों का डर फिलहाल भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। अगर यही स्थिति रही, तो आम आदमी से लेकर खास आदमी तक – सबकी जेबें ढीली हो सकती हैं।

यह कहानी सिर्फ पैसों की नहीं है, यह उन सपनों की भी है जो बड़ी-बड़ी कंपनियों, ऊँची इमारतों और चमचमाती कारों के पीछे छिपे होते हैं। सोमवार को जो कुछ भी हुआ, उसने ये सिखाया कि कोई भी कितना भी बड़ा क्यों न हो बाजार के एक झटके में सब कुछ बदल सकता है। जहां एक तरफ निवेशकों की साँसें अटकी रहीं, वहीं अरबपतियों के चेहरों पर भी पहली बार डर साफ दिखाई दिया। 

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