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मानसून बना वरदान: कृषि से जुड़े उद्योगों की कमाई में दो अंकों की वृद्धि की संभावना

कुल मिलाकर, 2025 का अच्छा मानसून सिर्फ कृषि को नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों को मजबूती देने का काम कर सकता है. यह ग्रामीण आय में सुधार, महंगाई में राहत और निवेश में तेजी के रूप में सामने आएगा. यदि सरकार और रिजर्व बैंक इस मौके का सही लाभ उठाते हैं, तो आने वाले महीनों में भारतीय शेयर बाजार में भी मजबूती देखने को मिल सकती है.

मानसून बना वरदान: कृषि से जुड़े उद्योगों की कमाई में दो अंकों की वृद्धि की संभावना
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Farmers Sector: 2025 में भारत के लिए मानसून कई मायनों में खास साबित हो सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार इस बार मानसून समय से पहले दस्तक देगा और सामान्य से अधिक वर्षा की उम्मीद है. इसका असर सिर्फ कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण मांग, महंगाई, ब्याज दरों और समग्र आर्थिक माहौल पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा. स्मॉलकेस मैनेजर गोलफाई की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि मानसून अच्छा रहता है, तो चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (अक्टूबर 2025 से मार्च 2026) में कृषि से जुड़े क्षेत्रों में 10-15% तक की सालाना वृद्धि देखी जा सकती है.

ग्रामीण मांग में तेजी की उम्मीद

मानसून का सीधा असर फसल की पैदावार पर होता है. अच्छी बारिश से खेती की लागत घटती है और पैदावार बढ़ती है, जिससे किसानों की आय में सुधार होता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि अच्छे मानसून की वजह से ट्रैक्टर्स, एग्री-इनपुट (जैसे बीज, खाद, कीटनाशक), ग्रामीण वित्तीय संस्थाएं (NBFCs), और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं (कंज्यूमर ड्यूरेबल्स) जैसे सेगमेंट में डबल डिजिट ग्रोथ संभव है। ग्रामीण मांग में सुधार से इन क्षेत्रों की बिक्री और आय दोनों में वृद्धि देखी जा सकती है.

महंगाई और ब्याज दरों पर राहत

अप्रैल 2025 के आंकड़ों के अनुसार खुदरा महंगाई दर घटकर 3.16% रह गई है, जबकि खाद्य महंगाई सिर्फ 1.78% पर आ गई है – जो कि पिछले कई वर्षों में सबसे निचला स्तर है. गोलफाई की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस ट्रेंड के जारी रहने पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) 6 जून को होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है, जिससे यह दर 5.75% तक आ सकती है. अगर महंगाई 4% से नीचे बनी रहती है, तो अगस्त 2025 की MPC बैठक में इसे और घटाकर 5.5% किया जा सकता है.

ब्याज दरों में कटौती से रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल्स, और NBFC जैसे ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों को फायदा मिलेगा. इससे क्रेडिट ग्रोथ बढ़ेगी और उपभोक्ता खर्च में भी तेजी आ सकती है.

राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत निरंतरता का समर्थन

गोलफाई के संस्थापक रॉबिन आर्य का मानना है कि 2025 में भारत एक खास आर्थिक और राजनीतिक संगम के दौर से गुजर रहा है. एक ओर जहां समय से पहले और सामान्य से अधिक वर्षा की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर हाल ही में आए चुनावी नतीजे नीति-निर्माण में निरंतरता का आधार प्रदान कर सकते हैं. इससे निवेशकों और व्यापार जगत को भरोसा मिलेगा, जो ग्रामीण और ब्याज-दर-संवेदनशील क्षेत्रों में पूंजी प्रवाह को गति देगा.

निफ्टी में 6-8% की संभावित तेजी

गोलफाई की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आने वाली दो तिमाहियों में निफ्टी 6-8% का रिटर्न दे सकता है. इसकी मुख्य वजहें हैं – ग्रामीण मांग में सुधार, महंगाई में कमी, और ब्याज दरों में संभावित कटौती. ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि सामान्य मानसून से ग्रामीण आय में 5-7% तक की वृद्धि होती है, जिससे उपभोग से जुड़े सेक्टर्स जैसे FMCG, दोपहिया वाहन, ग्रामीण बैंकिंग और माइक्रोफाइनेंस में सकारात्मक असर पड़ता है.

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कुल मिलाकर, 2025 का अच्छा मानसून सिर्फ कृषि को नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों को मजबूती देने का काम कर सकता है. यह ग्रामीण आय में सुधार, महंगाई में राहत और निवेश में तेजी के रूप में सामने आएगा. यदि सरकार और रिजर्व बैंक इस मौके का सही लाभ उठाते हैं, तो आने वाले महीनों में भारतीय शेयर बाजार में भी मजबूती देखने को मिल सकती है.

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