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कीमतें बढ़ीं तो ज्वेलरी मांग घटी, लेकिन निवेश में दिखी जबरदस्त तेजी

2025 की पहली तिमाही में वैश्विक और घरेलू स्तर पर गोल्ड बाजार में काफी हलचल देखने को मिली. निवेश के लिहाज़ से गोल्ड की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची, जबकि आभूषणों के लिए डिमांड में गिरावट आई.

कीमतें बढ़ीं तो ज्वेलरी मांग घटी, लेकिन निवेश में दिखी जबरदस्त तेजी
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Gold Rate: 2025 की पहली तिमाही में निवेश के रूप में गोल्ड की मांग में सालाना आधार पर 170% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस दौरान कुल निवेश मांग 552 टन तक पहुँच गई, जो कि 2022 की पहली तिमाही में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान देखे गए उच्चतम स्तर के बराबर है. यह डेटा मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ की एक ताज़ा रिपोर्ट से सामने आया है. रिपोर्ट में बताया गया कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से गोल्ड ETF (Exchange Traded Funds) में तेज़ी से हुए इनफ्लो के कारण हुई है.

गोल्ड ETF में इनफ्लो से बढ़ी मांग

जनवरी से मार्च 2025 की अवधि में दुनियाभर के गोल्ड ETF में कुल होल्डिंग्स 226 टन बढ़कर 3,445 टन पर पहुँच गई. यह दर्शाता है कि निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में गोल्ड को प्राथमिकता दी.

यूरोप: यहाँ लिस्टेड ETF फंड्स ने 55 टन सोना जोड़ा.

एशिया: एशिया में लिस्टेड फंड्स ने कुल 34 टन गोल्ड जोड़ा, जिसमें से बड़ी हिस्सेदारी चीन में लिस्टेड ETF की रही. चीन में यह मांग अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के चलते तेज़ी से बढ़ी है.

भारत: भारत में भी गोल्ड ETF होल्डिंग्स में 11% की तेज़ बढ़त देखी गई.

गोल्ड की कीमतों में तेज़ उछाल

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 की पहली तिमाही में गोल्ड की कीमतों में काफी तेज़ी देखने को मिली. इसके पीछे कई वैश्विक कारण रहे:

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव

टैरिफ वार्स (शुल्क युद्ध)

अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना

इन सब कारणों ने निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित किया, जिससे इसकी कीमतों में ज़ोरदार उछाल आया। कीमतों में बढ़त के चलते गोल्ड के कुल वैल्यू में सालाना आधार पर 40% की वृद्धि दर्ज की गई.

गोल्ड की आपूर्ति और डिमांड का संतुलन

2025 की पहली तिमाही में गोल्ड की वैश्विक आपूर्ति 1,206 टन रही, जो पिछले साल की तुलना में 1% अधिक है. यह आंकड़ा 2016 की पहली तिमाही के बाद सबसे ज़्यादा है. हालांकि, डिमांड वॉल्यूम में केवल मामूली वृद्धि हुई है, लेकिन ऊँची कीमतों के कारण वैल्यू के लिहाज से यह मांग काफी अधिक रही.

केंद्रीय बैंकों की बड़ी गोल्ड खरीद

दुनिया के विभिन्न केंद्रीय बैंकों ने भी बड़ी मात्रा में गोल्ड खरीदा है, जिससे संकेत मिलता है कि वे भी अस्थिरता के समय में इसे सुरक्षित संपत्ति मान रहे हैं.

कुल खरीद: 2025 की पहली तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने कुल 244 टन गोल्ड खरीदा.

भारत: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मार्च में 0.6 टन गोल्ड की खरीद की, जिससे देश का कुल गोल्ड रिज़र्व बढ़कर 879.6 टन हो गया. यह भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 11.7% है.

पिछले वर्ष: 2024 में RBI ने कुल 57.5 टन गोल्ड खरीदा था.

भारत में गोल्ड ज्वेलरी की मांग में गिरावट

हालांकि निवेश के लिए गोल्ड की मांग बढ़ी है, लेकिन सोने के आभूषणों की मांग में गिरावट देखने को मिली है.

2025 की पहली तिमाही में भारत में ज्वेलरी की मांग सालाना आधार पर 25% गिरकर केवल 71 टन रह गई.
यह 2020 की तीसरी तिमाही के बाद सबसे कम वॉल्यूम है.

इसकी प्रमुख वजह गोल्ड की बढ़ी हुई कीमतें हैं, जिसके कारण आम उपभोक्ताओं की खरीदने की क्षमता प्रभावित हुई है.

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2025 की पहली तिमाही में वैश्विक और घरेलू स्तर पर गोल्ड बाजार में काफी हलचल देखने को मिली. निवेश के लिहाज़ से गोल्ड की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची, जबकि आभूषणों के लिए डिमांड में गिरावट आई. केंद्रीय बैंकों की ओर से की जा रही भारी खरीदारी और वैश्विक अनिश्चितताओं ने गोल्ड की कीमतों को तेज़ी से ऊपर पहुंचाया है. आने वाले समय में अगर यही रुझान जारी रहे, तो गोल्ड निवेशकों के लिए एक प्रमुख विकल्प बना रह सकता है.

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