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Om Banna की ‘आत्मा’ Jodhpur से Pali की सड़क पर घूमती है, जिसने देखा उसकी ज़िंदगी बदल गयी

ओम बन्ना का पूरा नाम ओम सिंह राठौड़ था। वो बचपन से ही दयालु और गरीबों की मदद करने वाले के तौर पर जाने जाते थे। हां, ज़मीदार जोग सिंह के घर में पैदा होने के कारण उनमें एक अलग किस्म का रौब था। वो आज से 35 साल पहले रॉयल इनफील्ड बुलेट पर चला करते थे। ये 80 के दशक की बात है, तब, जब लोग बुलेट के बारे में सही से जानते भी नहीं थे। आखिर ओम बन्ना का एक्सीडेंट कैसे हुआ? ओम बन्ना के साथ हुए उस हादसे की पूरी डिटेल हमें किसी और ने नहीं उनके बेटे महापराक्रम सिंह ने बतायी। जो काफी कोशिशों के बाद Being Ghumakkad से बात करने के लिए राज़ी हुए।

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04 May 2024
( Updated: 10 Dec 2025
03:07 PM )
Om Banna की ‘आत्मा’ Jodhpur से Pali की सड़क पर घूमती है, जिसने देखा उसकी ज़िंदगी बदल गयी

रहस्यमयी सवालों से भरपूर ये कहानी दिन के उजाले में नहीं रात के अंधेरे में शुरू होती है | आज जिस ओम बन्ना को भगवान की तरह पूजा जाता है असल में वो थे कौन? क्यों राजस्थान में उनकी बुलेट को लोग चमत्कारी मानने लगे? क्या जोधपुर से पाली हाईवे के बीच घूमती है ओम बन्ना की आत्मा? क्या ओम बन्ना ट्रक डाइवर्स को आज भी रात के अंधेरे में दिख जाते हैं? क्या बुलेट वाले ओम बन्ना अंधेरे में लोगों की जान बचाते हैं? ऐसे सभी सवालों की तलाश ने Being Ghumakkdad को जोधपुर से पाली हाईवे पर जाने को मजबूर कर दिया।


जोधपुर से पाली हाईवे पर करीब 35 किलोमीटर चलने के बाद बुलेट बाबा के नाम से विख्यात ओम बन्ना का वो स्थान सड़क किनारे ही जाता है, जहां पर मत्था टेके बिना ज्यादातर राहगीर आगे नहीं बढ़ते। फिर चाहे वो खालिस भारतीय हों या विदेशों से आए मेहमान। कहते हैं ना आस्था और प्रार्थना दोनों अदृश्य होते हैं, लेकिन वो असंभव को भी संभव कर देते हैं। कुछ ऐसा ही ओम बन्ना के दरबार को लेकर विश्वास करते हैं लोग। मंदिर परिसर में जाएं उससे पहले आपको ओम बन्ना के भगवान के रूप में पूजने की पूरी कहानी बता दें।


ओम बन्ना का पूरा नाम ओम सिंह राठौड़ था। वो बचपन से ही दयालु और गरीबों की मदद करने वाले के तौर पर जाने जाते थे। हां, ज़मीदार जोग सिंह के घर में पैदा होने के कारण उनमें एक अलग किस्म का रौब था। वो आज से 35 साल पहले रॉयल इनफील्ड बुलेट पर चला करते थे। ये 80 के दशक की बात है, तब, जब लोग बुलेट के बारे में सही से जानते भी नहीं थे। आखिर ओम बन्ना का एक्सीडेंट कैसे हुआ? ओम बन्ना के साथ हुए उस हादसे की पूरी डिटेल हमें किसी और ने नहीं उनके बेटे महापराक्रम सिंह ने बतायी। जो काफी कोशिशों के बाद Being Ghumakkad से बात करने के लिए राज़ी हुए।


लोग बताते हैं हादसे वाली रात से ही रॉयल इनफील्ड बुलेट ने अजीबोगरीब हरकतें शुरू कर दी। ऐसा लगने लगा इनफील्ड किसी जादुई खिलौने की तरह रिएक्ट कर रही है। वो बार-बार खुद स्टार्ट होने लगी। उसे जंजीरों से बांधा गया, तो रात के अंधेरे में जंजीरें टूटने लगीं।



ओम बन्ना का मंदिर कोई बहुत भव्य या विशाल नहीं है, विशालता है उन पर हज़ारों-लाखों लोगो का विश्वास। और उसी विश्वास को महसूस करने, मन्नत मांगने लोग ओम बन्ना के इस दर पर पहुंचते हैं। ओम बन्ना के मंदिर में अंदर एक विशाल धुनी है, ओम बन्ना की वही स्पेशल नंबर वाली बुलेट है। साथ ही उनकी एक बड़ी तस्वीर को रखा गया है।


Being Ghumakkad की टीम चोटिला स्थित इस मंदिर के अंदर पहुंची तो वाकई हैरान रह गयी। हाईवे से गुजरने वाले लोग आते-जाते रुकते हुए यहां मत्था टेकते मिले। कुछ ऐसे लोग भी दिखे, जो मन्नत मांगने यहां पहुंचे। एक वर्ग यहां शराब भी चढ़ाता दिखायी दिया, ठीक वैसे ही जैसे काल भैरव को शराब चढ़ती है। लोग ऐसा मानते हैं शराब के चढ़ावे से उनकी मुरादें पूरी होंगी।ओम बन्ना को मानने वालों का एक बहुत बड़ा वर्ग है, वो सिर्फ राजपूतों के ही पूज्य नहीं हैं। वो हर समाज के लिए विश्वास की एक डोर हैं। किसी के लिए वो बुलेट वाले बाबा हैं, किसी के लिए भगवान तो किसी के लिए लोक देवता, जो सबको एक साथ जोड़े रखते हैं। उन पर अगाध विश्वास हमने उनके दर पर आए लोगों के बीच भी महसूस किया।


ऐसा नहीं कि ओम बन्ना का स्थान रातों-रात इतना प्रसिद्ध हो गया। ये तब हो पाया जब लोगों को लगने लगा कि चोटिला के इस स्थान पर कोई चमत्कारी शक्ति है, जो हर दम उनके साथ चलती है। बुलेट के लोग चक्कर लगाकर मन्नत मांगते हैं। इस बुलेट का नंबर RNJ 7773 भी बहुत खास है। 7773 नंबर अगर आप आरटीओ में लेने जाएंगे तो उसका अलग से चार्ज लगेगा। बुलेट का ये नंबर लाखों में मिलता है।


रॉयल इनफील्ड की पूजा करने में सबसे बड़ा हाथ उन ट्रक डाइवर्स का रहा जो यहां से रोज़ गुजरते थे। लोग कहते हैं ट्रक डाइवर्स धीरे-धीरे ऐसा मानने लगे थे कि रॉयल इनफील्ड और ओम बन्ना की तस्वीर के यहां लगने के बाद से हाईवे पर एक्सीडेंट ना के बराबर हो गए। 1989 में ओम बन्ना की दादी के कहने पर यहां उनका मंदिर और चबूतरा बनाया गया। जिसके बाद ओम बन्ना और रॉयल इनफील्ड की बातें अख़बार, टीवी न्यूज़ में होने लगीं, खुद रॉयल इनफील्ड की कंपनी ने यहां आकर इस बुलेट के बारे में जानकारी रिकॉर्ड की। आहिस्ता-आहिस्ता लोगों की भीड़ भी यहां उमड़ने लगी। आज उसी का नतज़ीता है कि सड़क के दोनों और बड़ी-बड़ी दुकानें खड़ी हो गयी हैं। मंदिर में लाखों का चढ़ावा आता है। लेकिन इसके अलावा एक वजह औऱ है जिसने ओम बन्ना को लोकप्रियता दिलायी। क्या ये वही सवाल और रहस्यमयी बातें हैं जिनकी तलाश में Being Ghumakkad यहां आया था? क्या ओम बन्ना वाकई इस हाइवे पर चलने वाले लोगों की जान बचाते हैं? क्या ओम बन्ना ट्रक डाइवर्स और मोटर साइकिल सवार लोगों को आज भी दिख जाते हैं? ओम बन्ना के इस रहस्य को जानने के लिए हमने कई लोगों से बात की। उन लोगों ने बताया कि अक्सर ओम बन्ना इस हाईवे पर दिख जाते हैं। लोगों का विश्वास है ओम बन्ना ने कई लोगों की जान यहां बचाई है। लोगों का ये विश्वास इस रूप में भी सच होता है कि ओम बन्ना के एक्सीडेंट के बाद इस हाईवे पर मंदिर के कई किलोमीटर तक कभी कोई भीषण हादसा नहीं हुआ। 


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ओम बन्ना के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की इच्छा ने हमें यहां सांझ होने तक रोके रखा। आखिर में वो लम्हा भी आया जब करीब शाम 7 बजे ओम बन्ना की आरती का वक्त हुआ। जो करीब 15 मिनट तक नॉनस्टॉप चलती रही। इस आरती में एक अजब सा खिंचाव महसूस हुआ। अगर आप कभी भी जोधपुर से पाली के रास्ते से गुजरें तो एक बार अपनी गाड़ी के पहियों को ज़रूर थाम लें और देखें इंसान के विश्वास के दम पर कैसे बुलेट की पूजा होने लगती है।

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