Advertisement

ईमानदारी की अद्भुत मिसाल: भारत का एक गांव जहां दुकानों पर नहीं लगता ताला, चोरी का कोई डर नहीं... लोग बिना निगरानी के पूरी ईमानदारी से करते हैं खरीदारी

क्या वाकई आज के समय में ऐसा गांव संभव है जहां दुकानों पर ताले न लगते हों, चोरी का कोई डर न हो और पूरा समाज सिर्फ ईमानदारी और विश्वास के सहारे चलता हो? खोनोमा गांव नागालैंड इसका अनोखा उदाहरण है.

Author
04 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:36 AM )
ईमानदारी की अद्भुत मिसाल: भारत का एक गांव जहां दुकानों पर नहीं लगता ताला, चोरी का कोई डर नहीं... लोग बिना निगरानी के पूरी ईमानदारी से करते हैं खरीदारी

नागालैंड की राजधानी कोहिमा से करीब 20 किमी दूर स्थित खोनोमा गांव को 2005 में भारत का पहला ग्रीन विलेज घोषित किया गया था. लेकिन आपकी निगाह सबसे पहले खींचेगा उसका अनूठा सामाजिक पहलू—यहां दुकानों पर ताले नहीं लगे होते, दुकानदार टेंशन-फ्री अंदर रहते हैं, और चोरी तो वैसे भी नामुमकिन है. 

‘ईमानदारी बॉक्स’ समाज का कारोबार मॉडल

खोनोमा में व्यापार का तरीका अनूठा है: “ऑनेस्टी बॉक्स” दुकान मे रहने वाला नहीं, लेकिन ग्राहक सामान लेता है और तय रकम बॉक्स में डालकर चला जाता है. यह प्रथा इस गांव की गहरी सोच और विश्वसनीयता की मिसाल है.

सांस्कृतिक आधार 154 ‘Kenyu’ नियम

इस विश्वास की जड़ है अंगामी नागा संस्कृति का पवित्र नियम, जिसे कहते हैं ‘Kenyü’ यह नियम-संहिता कुल 154 टेबू या नियमों से बनी है, जो सदाचार, सम्मान और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता पर जोर देती है. चोरी, बेईमानी और अन्याय को समाज में अशोभनीय माना जाता है, जो ‘Kenyü’ की धारणा से उपजता है. 

शिकारी से संरक्षक तक

1998 में, खोनोमा के अंगामी लोगों ने न केवल शिकार पर प्रतिबंध लगाया, बल्कि 20 वर्ग किमी क्षेत्र को संरक्षित वन घोषित कर, Khonoma Nature Conservation and Tragopan Sanctuary (KNCTS) की स्थापना की. यह कदम सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक था, पर्यावरण रक्षा और जैव विविधता को संरक्षित करना आज इस गांव की पहचान है. 

समाज के लिए प्रेरणा

जहाँ दुनिया में सुरक्षा कैमरे, ताले और निगरानी आम हो, वहीं खोनोमा का समाज विश्वास पर निर्भर, खुला और शांतिपूर्ण जीवन जीता है. यहाँ चोरी का कोई नाम-निशान नहीं, और यह गांव सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुका है. 

पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत

आज खोनोमा सिर्फ अखंड ईमानदारी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी कर्तव्यनिष्ठ जीवनशैली, पर्यावरण संरक्षण, बांस एवं बुनाई कला, हिस्ट्री (ब्रिटिश के साथ लड़ाई की विरासत) औऱ लोकल हॉमस्टे विकल्पों के लिए भी जाना जाता है. यह जगह पर्यटकों को सिर्फ देखने का नहीं, बल्कि सीखने का अवसर भी देती है. कैसे प्रकृति, संस्कृति और विश्वास का उद्धार एक सभ्य समाज में संभव है. 

ईमानदारी और संरक्षण का समन्वय

यह भी पढ़ें

खोनोमा गांव यह सन्देश देता है कि आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की अनुपस्थिति में भी, अगर सामुदायिक विश्वास, संस्कार और जिम्मेदारी हों तो समाज शांतिपूर्ण और समृद्ध हो सकता है. यह गांव न केवल नागालैंड बल्कि पूरे देश और विश्व के लिए नैतिक और पर्यावरणीय आदर्श की मिसाल है.

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें