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‘अमीरों के लिए भगवान का शोषण…’ कान्हा जी को हुआ 'कष्ट' तो भड़के CJI सूर्यकांत, भेज दिया नोटिस

CJI ने नाराजगी जताते हुए कहा, उल्टा अमीरों से मोटी रकम लेकर उन्हें खास पूजा कराई जाती है. सुप्रीम कोर्ट ने गोस्वामी समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत (Chief Justice Of India) ने मथुरा (Mathura) में बांके बिहारी मंदिर को लेकर बड़ी टिप्पणी की है. उन्होंने मंदिर में दर्शन के समय को बढ़ाने पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा, अमीरों की पूजा के लिए भगवान का शोषण किया जा रहा है. भगवान को आराम करने का समय भी नहीं मिल पाता. 

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में 15 दिसंबर (सोमवार) को बांके बिहारी मंदिर के गोस्वामी (पुजारियों) की एक समिति की याचिका पर सुनवाई हुई थी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने केस पर सुनवाई की. जिस पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मंदिर में दर्शन का समय बढ़ाकर भगवान को एक सेकंड के लिए भी आराम नहीं करने दिया जाता. CJI ने नाराजगी जताते हुए कहा, उल्टा अमीरों से मोटी रकम लेकर उन्हें खास पूजा कराई जाती है. 

क्या था मामला? 

गोस्वामी समाज की समिति बांके बिहारी मंदिर में पूजा पाठ समेत अन्य कार्यों की देखरेख करती है. इस समिति ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से मंदिर की देखरेख की निगरानी के लिए बनाई गई एक उच्चाधिकार समिति के फैसलों को चुनौती दी है. समिति ने ऐतराज जताते हुए कहा, सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी ने मंदिर में भगवान के दर्शन के समय में बदलाव किया है, जिससे भगवान को आराम का भी समय नहीं मिल पाता. जो कि यह रीति-रिवाज और परंपरा के खिलाफ है. 

याचिका में देहरी पूजा रोके जाने और मनमाने तरीके से गोस्वामी की नियुक्ति करने का भी आरोप लगाया गया. गोस्वामी समाज की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान पैरवी कर रहे थे. उन्होंने कोर्ट में कहा, ऐतिहासिक रूप से, मंदिर सख्त समय का पालन करता था. लेकिन अब मंदिर के समय में बदलाव से मंदिर के अंदर के रीति-रिवाजों में भी बदलाव आया है, जिसमें सुबह भगवान के जागने और रात को सोने का समय भी शामिल है. ये दर्शन के समय परंपरा और रीति-रिवाजों का हिस्सा रहे हैं. जिस समय मंदिर जनता के लिए खुला रहता है, वह एक लंबी परंपरा का हिस्सा है.

मंदिर समिति की इस चिंता को CJI सूर्यकांत ने गंभीरता से लिया. उन्होंने सख्त लहजे में कहा, उच्चाधिकार समिति क्या करती है? दोपहर 12 बजे मंदिर बंद करने के बाद भी वे (उच्चाधिकार समिति) भगवान को एक सेकंड के लिए भी आराम नहीं करने देते. भगवान का बहुत ज्यादा शोषण करते हैं. तथाकथित अमीर लोग, जो बड़ी रकम देते हैं फिर उन्हें खास पूजा करने की इजाज़त दी जाती है.

गोस्वामी समिति के वकील ने क्या कहा? 

चीफ जस्टिस की टिप्पणी पर मंदिर समिति के वकील श्याम दीवान ने कहा, ऐसा नहीं है, आपकी जजमेंट यह सुनिश्चित कर सकती है कि इसे प्रतिबंधित किया जाए. यह भगवान के लिए आराम का बहुत महत्वपूर्ण समय है. कोर्ट एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा उठा रहा है. समय पवित्र है और इसे बनाए रखा जाना चाहिए.
श्याम दीवान की दलील पर CJI इस पर एकमत नहीं थे उन्होंने आशंका जताते हुए कहा, इस समय खास लोगों से पैसे लेकर पूजा के लिए पूजा के लिए बुलाया जाता है. इस पर वकील श्याम दीवान ने कहा, ऐसी कोई शिकायत तो नहीं आई लेकिन आपकी (सुप्रीम कोर्ट) आशंका सही है और इस पर अलग से ध्यान दिया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने किसे भेजा नोटिस? 

इस मामले में आगे की सुनवाई जनवरी के पहले हफ्ते में होगी. तमाम दलीलों को सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने उच्चाधिकार कमिटी और UP सरकार को नोटिस भेजा है. 

कब गठित हुई उच्चाधिकार समिति 

दरअसल, अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के रोजाना के कामकाज की देखरेख और निगरानी के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च अधिकार वाली मैनेजमेंट कमिटी का गठन किया था. कोर्ट ने UP सरकार के उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 के तहत गठित कमेटी को निलंबित करने के बाद इसे गठित किया था.  

वहीं, UP सरकार की श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट ऑर्डिनेंस 2025 लायी है. इसके आने से 1939 से मंदिर संचालन का काम देखने वाली गोस्वामी समाज की प्रक्रिया को हटा दिया गया है. सरकार के इस अध्यादेश से गोस्वामी समाज में नाराजगी थी. इसलिए गोस्वामी समाज ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नई मैनेजमेंट कमिटी (उच्चाधिकार समिति) गठित की और कहा, जब तक हाई कोर्ट इस मामले पर फैसला नहीं करता, सुप्रीम कोर्ट की मैनेजमेंट कमिटी मंदिर का प्रभार संभालेगी. हालांकि अब गोस्वामी समाज की कमिटी मैनेजमेंट कमिटी के फैसलों से नाराज है. 

क्या है बांके बिहारी में मंदिर पूजा का समय? 

मथुरा में बांके बिहारी में कान्हा जी की मूर्ति को सजीव मानकर उनकी पूजा होती है. पूरे 24 घंटे का उनका शेड्यूल फिक्स रहता है. पुजारी बांके बिहारी को नियम से सुबह जगाते हैं, श्रृंगार और भोग लगाया जाता है. इसके बाद कान्हा जी को दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के सामने लाते हैं, फिर दोपहर में भोग लगाकर आराम करने देते हैं. फिर शाम को भी ये ही शेड्यूल फॉलो होता है. दोपहर में कान्हा जी आराम करते हैं. हालांकि CJI सूर्यकांत ने कहा कि जब दोपहर को भगवान आराम करते हैं उस समय उन्हें आराम भी नहीं करने दिया जाता है. फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. 

 

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