पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर कर्नाटक के युवक ने की आत्महत्या, जानिए पूरा मामला
कर्नाटक के हुबली में पीटर गोल्लापल्ली नाम के युवक ने अपनी पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली। परिवार का आरोप है कि उसकी पत्नी उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी और किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंधों में लिप्त थी।
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इंसान की सहनशक्ति की भी एक सीमा होती है, और जब अपनों से ही मिले ज़ख्म घाव बनने लगें, तो वह टूट जाता है। ऐसा ही एक दर्दनाक मामला कर्नाटक के हुबली में सामने आया, जहाँ पीटर गोल्लापल्ली नाम के युवक ने अपनी पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली। पीटर के परिवार का दावा है कि उसकी पत्नी उसे मानसिक और भावनात्मक रूप से लगातार प्रताड़ित कर रही थी, जिससे वह इस कदर टूट गया कि उसे आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाना पड़ा।
पीटर गोल्लापल्ली की माँ रेबेकम्मा का कहना है कि उनका बेटा एक सीधा-सादा और भोला इंसान था, जिसने अपनी पत्नी को हमेशा सम्मान दिया, लेकिन बदले में उसे केवल अपमान और धोखा ही मिला। शादी के शुरुआती दिनों में सबकुछ सामान्य था, लेकिन जल्द ही रिश्ते में दरारें आने लगीं। रेबेकम्मा ने बताया कि उनकी बहू का व्यवहार ठीक नहीं था, वह आए दिन पीटर से झगड़ा करती और बेवजह उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करती थी।
पति-पत्नी में अनबन की वजह?
पीटर और उसकी पत्नी एक बार गोवा घूमने गए थे, लेकिन बीच रास्ते में ही उसकी पत्नी अचानक बीमार होने की बात कहकर लौट आई। परिवार का कहना है कि यह सिर्फ़ एक बहाना था, असल में वह किसी और से मिलने के लिए वापस लौटी थी। यह घटना पीटर के मन में शक पैदा करने लगी, लेकिन वह अपने रिश्ते को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करता रहा। पीटर की पत्नी एक शिक्षिका थी, लेकिन वह अक्सर देर रात तक घर से बाहर रहती थी। जब पीटर ने इस बारे में सवाल किए, तो उसने उसे झिड़क दिया और कहा कि यह उसका व्यक्तिगत जीवन है और उसे इसमें दखल देने का कोई हक़ नहीं। इस तरह के जवाब और व्यवहार ने पीटर को पूरी तरह से झकझोर दिया।
तलाक की अर्जी और 20 लाख की मांग
जब चीज़ें ज़्यादा बिगड़ गईं, तो पीटर की पत्नी घर छोड़कर अपने मायके चली गई और तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। पीटर पहले ही मानसिक तनाव में था, लेकिन जब उसे पता चला कि उसकी पत्नी तलाक के बदले 20 लाख रुपये की मांग कर रही है, तो वह पूरी तरह से टूट गया। परिवार का आरोप है कि उसकी पत्नी ने उसे इतना प्रताड़ित किया कि वह निराशा के अंधेरे में चला गया। वह लगातार इस चिंता में रहने लगा कि समाज में उसकी क्या छवि बनेगी, उसके माता-पिता का क्या होगा, और वह इतनी बड़ी रकम कहाँ से लाएगा।
आत्महत्या से पहले लिखे आखिरी शब्द
सोमवार को, जिस दिन उसकी तलाक की सुनवाई थी, उसी दिन पीटर ने आत्महत्या कर ली। उसने अपने घर में फांसी लगा ली और अपने आखिरी शब्द अपनी आत्महत्या नोट में लिखे। नोट में लिखा था "डैडी, मुझे माफ़ कर दो। पिंकी (मेरी पत्नी) मुझे मार रही है। वह मेरी मौत चाहती है।" इतना ही नहीं, पीटर की इच्छा के अनुसार, उसके ताबूत पर भी यह लिख दिया गया कि उसकी मौत की वजह उसकी पत्नी की प्रताड़ना थी।
पीटर की आत्महत्या का मामला अकेला नहीं है। हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहाँ पुरुषों को उनकी पत्नियों द्वारा मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कुछ समय पहले बेंगलुरु में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के घर के सामने खुद को आग लगा ली, क्योंकि वह अपनी पत्नी को तलाक की याचिका वापस लेने के लिए मना नहीं सका। इसी तरह, एक टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल, अतुल सुभाष, ने अपनी पत्नी के तीन करोड़ रुपये की मांग से परेशान होकर आत्महत्या कर ली।
ये घटनाएँ समाज के उस कड़वे सच को उजागर करती हैं, जिस पर कम ही चर्चा होती है—जब महिलाएँ अपने अधिकारों का दुरुपयोग करके अपने पतियों का मानसिक शोषण करती हैं। यह मामला कई सवाल खड़े करता है। क्या हमारे समाज में पुरुषों के साथ होने वाले शोषण को गंभीरता से नहीं लिया जाता? क्या कोई ऐसा क़ानून है जो उन्हें इस तरह की परिस्थितियों से बचा सके।
इस तरह की घटनाएँ यह दिखाती हैं कि मानसिक उत्पीड़न केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष भी इसके शिकार होते हैं। अब समय आ गया है कि इस विषय पर खुलकर चर्चा हो और एक ऐसा सिस्टम बनाया जाए, जो सभी के लिए समान न्याय सुनिश्चित कर सके।
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