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शशि थरूर ने खोली ट्रंप के दावों की पोल, पाकिस्तान की भी निकाली हेकड़ी, बताया कैसे युद्ध रोकने की लगाई थी गुहार

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ट्रंप के दावों की पोल खोल दी है. उन्होंने भारत के दशकों पुराने स्टैंड को मजबूती से रखते हुए साफ कर दिया कि न तो ट्रंप का कोई दबाव था, न भारत से उनकी कोई बात हुई थी और न ही भारत ने किसी की कोई बात सुनी थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने जंग रोकने की गुहार लगाई थी, जिसके बाद ही भारत ने अपनी कार्रवाई रोकी.

Shashi Tharoor / Trump (File Photo)

कांग्रेस सांसद और संसद में विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पोल खोल दी है. इतना ही नहीं, उन्होंने पाकिस्तान की भी हवा निकाल दी है. थरूर ने साफ कर दिया कि ट्रंप का सीजफायर रुकवाने के लिए ट्रेड और टैरिफ का इस्तेमाल करने का दावा बिल्कुल गलत है. इतना ही नहीं, उन्होंने दो टूक कहा कि मई में भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष को रोकने के दौरान यह मुद्दा कहीं नहीं आया और न ही यह कि हिंदुस्तान की सरकार से यह कहा गया हो कि यह करो या वह करो.

उन्होंने यह बातें गैर-सरकारी संगठन ‘कट्स इंटरनेशनल’ द्वारा आयोजित एक टॉक में सरकार के अलग-अलग स्तर के अधिकारियों के साथ हुई अपनी बातचीत और की गई ब्रीफिंग का हवाला देते हुए कहीं. हालांकि, कांग्रेस के आधिकारिक रुख से उनके बयान अलग हैं.

ट्रंप के दावों को लेकर हुए सवाल पर कांग्रेस सांसद ने साफ कहा कि जब वे वॉशिंगटन में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे, तब उनसे इस बारे में पूछा गया था. थरूर ने कहा कि भारत को कभी किसी को मनाने की जरूरत नहीं पड़ी. उन्होंने बताया कि 6-7 मई की रात को की गई शुरुआती कार्रवाई से ही भारत ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया था कि वह पाकिस्तान के साथ किसी लंबी लड़ाई या संघर्ष में जाने का इच्छुक नहीं है. ऐसा भारत अपने लक्ष्यों की प्राप्ति और बतौर बड़ी इकोनॉमी के लिहाज से कह रहा था.

भारत ने किया सटीक और टार्गेटेड हमला: थरूर

भारत की पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई और उद्देश्य पर बात करते हुए थरूर ने कहा कि “हम बेहद सटीक और लक्षित तरीके से आतंकी ठिकानों पर हमले कर रहे थे. हमने पाकिस्तानी नागरिक ठिकानों, सरकारी ठिकानों और यहां तक कि सैन्य प्रतिष्ठानों पर भी हमला करने से परहेज किया था, और इसलिए अगर पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई न करने का फैसला किया होता, तो हमारा काम तमाम हो जाता.” अब जब पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की है, तो “हमें जवाब देना होगा, लेकिन जिस वक्त वे हमले रोकेंगे, हम भी रुक जाएंगे.”

‘पाकिस्तान ने लगाई गुहार, फिर हमने रोकी जंग’

उन्होंने आगे कहा कि सैन्य कार्रवाई के चारों दिन सरकार के एक्शन से यह बात साफ थी, इसलिए जाहिर है कि भारत को किसी को समझाने की कोई जरूरत नहीं थी. “जिस वक्त पाकिस्तान ने आकर कहा कि ‘हम संघर्ष समाप्त कर देते हैं’, हमने संघर्ष समाप्त कर दिया.”

‘भारत की ट्रंप से नहीं हुई थी कोई बात’

उन्होंने कहा, “दूसरी ओर, जैसा कि मैंने पहले भी कहा था, मैं यहां बिना पूरी जानकारी के बात कर रहा था, क्योंकि मुझे सरकार की ओर से कोई आधिकारिक ब्रीफिंग नहीं मिली थी. हमें यह नहीं पता कि वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच क्या बातचीत हुई थी. अगर ट्रंप ने पाकिस्तानियों को शांति के लिए बातचीत की मेज पर लाने में कोई अहम भूमिका निभाई है, तो एक शांति-प्रिय देश होने के नाते हम इसके लिए उनके आभारी हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “हालांकि सरकार के अधिकारियों से हुई बातचीत से मेरी जो समझ बनी है, उसके मुताबिक ट्रंप से इस मुद्दे पर कोई सीधी बातचीत नहीं हुई थी. न ही शांति के नाम पर व्यापार को लेकर किसी तरह की धमकी दी गई थी. न ही भारत पर ऐसा कोई दबाव बनाया गया था कि वह कोई खास कदम उठाए या किसी खास तरीके से काम करे.” थरूर ने यह भी साफ किया कि वह सरकार का हिस्सा नहीं हैं और इसलिए उनके पास किसी तरह की गोपनीय या अंदरूनी जानकारी नहीं है.

भारत-पाक के बीच जंग रुकवाने का ट्रंप लेना चाह रहे क्रेडिट!

10 मई को जब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि वाशिंगटन की मध्यस्थता में हुई लंबी रात की बातचीत के बाद भारत और पाकिस्तान एक पूर्ण और तत्काल युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं, तब से अमेरिकी राष्ट्रपति 60 से अधिक बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने दोनों पड़ोसी देशों के बीच संघर्ष को खत्म करने में भूमिका निभाई.

भारत ने हमेशा खारिज किया ट्रंप का दावा!

भारत ने लगातार किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से इनकार किया है. भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के प्रतिशोध में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे. चार दिनों तक चले तीव्र सीमा-पार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान 10 मई को संघर्ष समाप्त करने के लिए एक समझौते पर पहुंचे.

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