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CJI Surykant Oath: आर्टिकल 370 से लेकर पेगासस जासूसी विवाद तक… देश के नए चीफ जस्टिस के वो बड़े फैसले जो चर्चा में रहे

देश के नए CJI के शपथ ग्रहण समारोह में 7 देशों के चीफ जस्टिस पहुंचे थे. जिसमें ब्राजील, भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश और उनके परिवार के लोग शामिल थे.

Justice Suryakant

जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाल लिया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शपथ दिलाई. शपथ के बाद जस्टिस सूर्यकांत पूर्व CJI बीआर गवई से गले मिले और फिर अपने मां-पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया. 

देश के नए CJI के शपथ ग्रहण समारोह में 7 देशों के चीफ जस्टिस पहुंचे थे. जिसमें ब्राजील, भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश और उनके परिवार के लोग शामिल थे. गौरतलब है कि बीआर गवई का कार्यकाल 23 नवंबर को खत्म हो गया था. 

कौन हैं नए CJI सूर्यकांत? 

10 फरवरी 1962 हरियाणा के हिसार में जन्में सूर्यकांत बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं. हिसार से ही उन्होंने शुरुआती वकालत की और आज देश के चीफ जस्टिस बनने तक का सफर तय किया. उन्होंने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में भी प्रैक्टिस की. 

  • जस्टिस सूर्यकांत ने साल 1981 में हिसार से ग्रेजुएशन पूरा किया. इसके बाद रोहतक से LLB और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से LLM किया है. 
  • साल 2018 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था.
  • साल 2019 में जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. 
  • साल 2024 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लीगल सर्विसेज कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया. 
  • इसके अलावा जस्टिस सूर्यकांत नेशनल लीगल अथॉरिटी के सदस्य भी रहे हैं. 
  • जस्टिस सूर्यकांत इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट की विभिन्न समितियों के सदस्य भी रह चुके हैं. 

जस्टिस सूर्यकांत के बड़े फैसले जो चर्चा में रहे 

Article 370 पर ऐतिहासिक फैसला: जस्टिस सूर्यकांत उन 5 जजों की संविधान बेंच में शामिल थे जिन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले को वैध करार दिया था
राजद्रोह कानून पर लगाई थी रोक: जस्टिस सूर्यकांत उस बेंच का भी हिस्सा थे जिसने धारा 124A यानी राजद्रोह कानून पर प्रभावी रोक लगाई थी. फैसले में कहा गया था राज्य और केंद्र इसे तब तक लागू न करें जब  तक कानून की पूरी समीक्षा पूरी नहीं की जाती. 

पेगासस जासूसी विवाद: पेगासस स्पाइवेयर मामले में जस्टिस सूर्यकांत ने जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों की विशेष समिति गठित करने के फैसले में भाग लिया. उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सरकार को असीमित शक्तियां नहीं दी जा सकतीं.

बिहार मतदाता सूची विवाद: SIR पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वोटर लिस्ट से हटाए गए 65 लाख नामों की पूरी डिटेल सार्वजनिक की जाए. 
महिला सरपंच पर बड़ा फैसला: जस्टिस सूर्यकांत ने एक महिला सरपंच को पद से हटाने के फैसले को गैरकानूनी करार दिया था. सरपंच को पद  पर फिर बहाल किया और फैसला सुनाते हुए कहा, महिलाओं के खिलाफ भेदभाव अस्वीकार्य है. 

जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन समेत सभी बार एसोसिएशन में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्देश भी दिया था. जो उनके ऐतिहासिक कदमों में से एक माना जाता है.

PM मोदी की सुरक्षा चूक का मामला: साल 2022 में जब PM मोदी पंजाब के दौरे पर गए थे वहां उनकी सूरक्षा में चूक का मामला सामने आया था. जस्टिस सूर्यकांत ने जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाने के आदेश दिए थे.

इसके अलावा जस्टिस सूर्यकांत उस पीठ का भी हिस्सा हैं जो राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों से जुड़े अहम मामलों की सुनवाई कर रहा है. 
जस्टिस सूर्यकांत ने वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना को संवैधानिक मान्यता देते हुए इसे सही ठहराया था.

रणवीर इलाहाबादिया विवाद: जस्टिस सूर्यकांत रणवीर इलाहाबादिया की अपमानजनक टिप्पणी मामले में भी सुनवाई कर चुके हैं. सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब सामाजिक मर्यादाएं तोड़ने का अधिकार नहीं है. जस्टिस सूर्यकांत अब देश के नए चीफ जस्टिस हैं जो कि 9 फरवरी 2027 तक इस पद पर बनें रहेंगे. उनका कार्यकाल लगभग 14 महीने का होगा.

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