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संकट आई या पैदा की गई...इंडिगो पर चलेगा चाबूक! जांच के घेरे में DGCA, जवाबदेही शुरू, CEO और COO को किया गया तलब

Indigo Airlines Crisis: शीतकालीन सत्र में उठे इंडिगो संकट के मुद्दे पर सरकार ने विस्तार से अपना पक्ष रखा. नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने राज्यसभा में स्वीकार किया कि एयरलाइन की आंतरिक खामियों के कारण यह विकट स्थिति पैदा हुई. अब इस मामले में एक्शन शुरू हो गया है.

देश के विमानन क्षेत्र में अकेले करीब 60% मार्केट शेयर रखने वाली कंपनी इंडिगो में आई गड़बड़ी और संकट ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है. इसकी गूंज संसद तक सुनाई दी. मामला सदन में भी उठा, जहां सरकार ने विस्तार से बताया कि वास्तव में हुआ क्या है. कहा जा रहा है कि ऐसी स्थिति करीब 20 सालों में नहीं देखने को मिली.

DGCA के नए FDTL मॉड्यूल लागू होने और क्रू की कमी के कारण इंडिगो का सिस्टम पूरी तरह क्रैश हो गया. DGCA ने जैसे ही पायलट वीकली रेस्ट और नाइट ड्यूटी नियम लागू करने का आदेश दिया, इंडिगो की पूरी व्यवस्था चरमरा गई. चूंकि सबसे ज्यादा रूट्स, विमान और यात्री इंडिगो के पास हैं, इसलिए असर सबसे ज्यादा इसी पर हुआ. जैसे ही इंडिगो ने एक के बाद एक फ्लाइट रद्द करनी शुरू की, यात्रियों की परेशानियों की बाढ़ आ गई. सरकार ने इस संकट को लेकर इंडिगो को फटकार लगाई है. इतना ही नहीं, पूरे मामले की बहु-स्तरीय जांच भी शुरू कर दी गई है. कहा जा रहा है कि सरकार इस बार ऐसी कार्रवाई कर सकती है जो बाकी कंपनियों के लिए मिसाल बन जाए.

इंडिगो के CEO और COO तलब

इसी बीच केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कथित तौर पर इंडिगो मैनेजमेंट को इस पूरे संकट के लिए जिम्मेदार माना है. इसी को देखते हुए मंत्रालय द्वारा गठित 'फैक्ट फाइंडिंग कमेटी’ ने कंपनी के सीईओ (CEO) और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) को  तलब कर ल‍िया है. सूत्रों की मानें तो सरकार ये यकीन है कि  एयरलाइन ने स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया और चीजों को हल्के में लेने की भूल की है

संसद में सरकार ने क्या कहा?

शीतकालीन सत्र में उठे इंडिगो संकट के मुद्दे पर सरकार ने विस्तार से अपना पक्ष रखा. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने राज्यसभा में स्वीकार किया कि एयरलाइन की आंतरिक खामियों के कारण यह विकट स्थिति पैदा हुई और जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि इंडिगो अपने क्रू मैनेजमेंट और नए रोस्टर को सही से संभाल नहीं पाया, इसलिए व्यवस्था ध्वस्त हो गई.

उन्होंने स्पष्ट कहा कि मोदी सरकार यात्रियों, पायलटों और क्रू की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगी. यानी भले ही सरकार ने नए रोस्टर को फिलहाल वापस ले लिया हो, लेकिन आने वाले समय में इसे दोबारा लागू किया जा सकता है. सरकार के बयान से इसके स्पष्ट संकेत मिले हैं. नायडू ने यह भी कहा कि किसी भी एयरलाइन द्वारा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

इंडिगो संकट की जांच करेगी सरकार

सरकार के बयान के बीच बड़ी जानकारी यह सामने आई कि फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों में कथित जानबूझकर की गई लापरवाही और साजिश जैसी संभावनाओं को लेकर इंडिगो की जांच की जाएगी. सरकार इस बात से भी नाराज़ है कि एयरलाइन ने 1 नवंबर से लागू होने वाले नियमों पर तैयारी करने की बजाय कई हफ्तों तक ढील और छूट मांगने में समय गंवाया.

जानकारी के अनुसार, जल्द गठित होने वाली एक चार सदस्यीय समिति यह भी जांच करेगी कि क्रू और पायलटों की ड्यूटी FDTL के मुताबिक तय की गई या जानबूझकर गड़बड़ी की गई.

क्या इंडिगो ने नियम टालने की कोशिश की?

सूत्रों के मुताबिक, जांच समिति अक्टूबर माह के अंत तक DGCA और इंडिगो के बीच हुई बातचीत की समीक्षा करेगी ताकि यह पता चल सके कि समस्या की जड़ कहां थी. यह भी देखा जाएगा कि एयरलाइन ने रात में लैंडिंग सीमाओं में ढील की मांग की या नहीं और क्या इसे लागू करने में जानबूझकर देरी की गई.

क्रू रोस्टरिंग सिस्टम की भी जांच

कहा जा रहा है कि इंडिगो को उम्मीद थी कि क्रू रोस्टरिंग सिस्टम को लेकर उसे नियामकीय राहत मिल जाएगी, इसलिए उसने आवश्यक अपडेट भी देर से किए. नए नियमों के तहत जेप्पेसन क्रू रोस्टरिंग सॉफ़्टवेयर का अपडेट अनिवार्य था.

क्या DGCA की भूमिका संदिग्ध है?

सरकार DGCA की भूमिका की भी जांच करेगी. कोर्ट के निर्देशों के बावजूद रेग्युलेटर ने समय पर नए सिस्टम के क्रियान्वयन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया. यह भी देखा जाएगा कि इंडिगो की मांगों पर DGCA ने क्या कार्रवाई की और क्यों. जहां अन्य एयरलाइनों ने अपनी तैयारी रिपोर्ट दे दी थी, वहीं इंडिगो ने ऐसा नहीं किया.

यात्रियों को लेकर सरकार का रुख

राम मोहन नायडू ने कहा कि जिन यात्रियों को देरी और कैंसलेशन से दिक्कत हुई है, उनके लिए सख्त सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CARs) लागू हैं, और एयरलाइनों को इन्हें मानना ही होगा. उन्होंने कहा कि जांच शुरू हो चुकी है. लगातार टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के चलते चुनौतियाँ आती रहती हैं, लेकिन सरकार का साफ लक्ष्य है कि भारत का एविएशन सेक्टर दुनिया के टॉप ग्लोबल स्टैंडर्ड्स पर काम करे.ो

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