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जिस संगठन से खौफ में अमेरिका, ट्रंप की भी है टेढ़ी नजर…उस BRICS की डंके की चोट पर कमान संभालने जा रहा भारत
ट्रंप की धमकियों और चेतावनियों के बावजूद भारत ब्रिक्स समूह को और मजबूती देने जा रहा है. एक ओर जहां ब्रिक्स नौसैनिक अभ्यास हो रहा है, तो दूसरी ओर भारत डंके की चोट पर BRICS 2026 की मेजबानी करने जा रहा है. लोगो, थीम और वेबसाइट भी लॉन्च कर दी गई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ब्रिक्स समूह को लेकर उग्र तेवरों के बीच चीन, रूस और ईरान के जंगी जहाज दक्षिण अफ्रीका में जुटे हैं. यहां शनिवार से जॉइंट नेवल एक्सरसाइज ‘विल फॉर पीस 2026’ शुरू हुआ है. मेजबान देश ने इसे ब्रिक्स प्लस ऑपरेशन बताया है, जिसका मकसद दुनिया को शांति का संदेश देने के साथ-साथ “शिपिंग और समुद्री आर्थिक गतिविधियों की सुरक्षा पुख्ता” करना है. आपको बता दें कि इस अभ्यास पर अमेरिका की भी निगाह बनी हुई है. इसे अमेरिका की आक्रामक कूटनीति का जवाब भी माना जा रहा है.
इसी बीच भारत ने ‘ब्रिक्स 2026’ आयोजन की कमान संभाल ली है. मंगलवार को ‘ब्रिक्स 2026’ की वेबसाइट, थीम और लोगो लॉन्च किए गए. इस मौके पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे. इस दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि हम ‘ब्रिक्स’ की भारत की अध्यक्षता के लिए लोगो, थीम और वेबसाइट का औपचारिक अनावरण कर रहे हैं. जिस तरह मकर संक्रांति ये त्योहार आशा और सद्भावना का संदेश देते हैं, उसी तरह भारत की ‘ब्रिक्स’ अध्यक्षता भी बड़े वैश्विक कल्याण के लिए संगठन में शामिल देशों की क्षमता को एक साथ लाने का प्रयास करेगी.
दूसरी तरफ नौसैनिक अभ्यास को लेकर साउथ अफ्रीकन डिफेंस डिपार्टमेंट ने जानकारी दी है कि इस साल के अभियान का नेतृत्व चीन कर रहा है और इसे साउथ अफ्रीका के साइमन टाउन नेवल बेस में होस्ट किया जा रहा है. यह नेवल ड्रिल 16 जनवरी तक चलेगी.
ब्रिक्स प्लस में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
ब्रिक्स प्लस एक भूराजनीतिक ब्लॉक का विस्तार है, जिसमें मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका शामिल थे. सदस्य इसे अमेरिका और पश्चिमी देशों के आर्थिक दबदबे के मुकाबले एक मजबूत दावेदार के रूप में देखते हैं. अब इस समूह में छह और देश भी शामिल हो चुके हैं.
ट्रंप के ब्रिक्स को लेकर तेवरों के बीच युद्धाभ्यास!
हालांकि साउथ अफ्रीका नियमित रूप से चीन और रूस के साथ नौसैनिक युद्धाभ्यास करता है, लेकिन यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और चीन, ईरान, साउथ अफ्रीका और ब्राजील समेत कई ब्रिक्स प्लस देशों के बीच तनाव बढ़ गया है. बढ़े हुए समूह में मिस्र, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, इथियोपिया और यूनाइटेड अरब अमीरात भी शामिल हैं.
ब्रिक्स को लेकर क्या बोले ट्रंप!
बता दें कि ट्रंप ने ब्रिक्स देशों पर “अमेरिका-विरोधी” राजनीति करने का आरोप लगाया है और पिछले साल जनवरी में सभी सदस्यों को दुनिया भर के देशों पर पहले से लगाए जा रहे शुल्क के ऊपर 10 फीसदी अतिरिक्त ट्रेड टैरिफ लगाने की धमकी दी थी. साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा की पार्टी के गठबंधन में शामिल एक दल ने कहा कि ये एक्सरसाइज “हमारी घोषित तटस्थता नीति के विपरीत हैं” और ब्रिक्स ने “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साउथ अफ्रीका को एक मोहरा बना दिया है.”
20 साल पूरे करने जा रहा ब्रिक्स
आपको बता दें कि 2026 में भारत की अध्यक्षता के दौरान ‘ब्रिक्स’ अपनी स्थापना के 20 साल पूरे करेगा. यह उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में लगातार विकसित हुआ है. पिछले कुछ वर्षों में ‘ब्रिक्स’ ने अपने एजेंडे और सदस्यता का विस्तार किया है और बदलती वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप लोगों-केंद्रित विकास, संवाद को बढ़ावा देने और व्यावहारिक सहयोग पर फोकस किया है.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत की अध्यक्षता की चार प्रमुख प्राथमिकताएं होंगीलचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता. उन्होंने यह भी कहा कि ‘ब्रिक्स’ के तीन मूलभूत स्तंभराजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच आदान-प्रदानएक सुसंगत और संतुलित ढांचा प्रदान करेंगे. अमेरिका का मानना है कि BRICS समूह अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है.
BRICS से खौफ में अमेरिका!
आपको बता दें कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका BRICS को अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती देने वाले संगठन के रूप में देखता है. अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत उसकी करेंसी है. ऐसे में अगर ब्रिक्स देशों के बीच साझा व्यापार शुरू हो जाता है, वह भी ब्रिक्स करेंसी में, तो यह डॉलर के लिए किसी झटके से कम नहीं होगा. हालांकि इसकी राह आसान नहीं है. मालूम हो कि बीते कुछ समय से म्यूचुअल करेंसी में ट्रेड की मांग बढ़ी है. ऐसे में ट्रंप इस ब्लॉक को अमेरिका के लिए एक बड़े आर्थिक खतरे के रूप में देखते हैं.
ट्रंप की ब्रिक्स को धमकी!
जनवरी 2025 में दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप का अंदाज और सख्त हो गया है. वे हर उस समूह को निशाने पर ले रहे हैं जिससे अमेरिका को खतरा महसूस हो रहा है. इतना ही नहीं, अमेरिका एक-के-बाद-एक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अलग भी हो रहा है. इससे पहले ट्रंप ने सभी BRICS देशों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी. ट्रंप ने पिछले साल जुलाई में कहा था, “जब मैंने BRICS के इस समूह, छह देशों के बारे में सुना, तो मैंने उन पर बहुत-बहुत कड़ी चोट की. और अगर वे कभी सच में सार्थक तरीके से बनते हैं, तो यह बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा.” उन्होंने यह भी कहा, “हम कभी किसी को हमारे साथ खेल खेलने नहीं दे सकते.”
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