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पल्‍ला गांव से जुड़ी दिल्‍ली की जल आपूर्ति प्रणाली, समझें पूरा सिस्‍टम

यमुना जल हरियाणा और दिल्‍ली में पानी की आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। पल्‍ला गांव में जल आपूर्ति का एक महत्‍वपूर्ण पहलू है, और यहां से दिल्‍ली में पानी की आपूर्ति किस प्रकार होती है, आइए जानते हैं।

दिल्ली में इन दिनों पानी को लेकर जबरदस्त राजनीति गरमाई हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के एक बयान ने सियासी भूचाल ला दिया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि हरियाणा सरकार जानबूझकर यमुना के पानी में ज़हर मिला रही है और दिल्लीवासियों को दूषित जल पीने पर मजबूर कर रही है। इस बयान के बाद बीजेपी ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया और दिल्ली की सीएम आतिशी ने चुनौती दे डाली कि अगर पानी साफ है, तो बीजेपी नेता इसे पीकर दिखाएं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस चुनौती को स्वीकारते हुए पल्‍ला गांव का दौरा किया और वहां यमुना का पानी हाथ में लेकर सार्वजनिक रूप से पीकर दिखाया। इसके बाद से ही यह सवाल उठने लगे कि आखिर यह पल्ला गांव है कहां, और दिल्ली को पानी की सप्लाई कैसे होती है? आइए, इस पूरे सिस्टम को विस्तार से समझते हैं।

दिल्ली को कहां से मिलता है पानी?

दिल्ली खुद अपने लिए पानी का उत्पादन नहीं कर पाती। हालांकि, यहां भूमिगत जल और कुछ झीलों से भी पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं होता। इसलिए, दिल्ली को पड़ोसी राज्यों से पानी लेना पड़ता है। उसे इसके लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। हरियाणा यमुना नदी के जरिए पानी सप्लाई करता है, जबकि उत्तर प्रदेश गंगा से, और पंजाब भाखड़ा नंगल डैम के जरिए दिल्ली तक पानी पहुंचाता है।

हर दिन हरियाणा से यमुना के जरिये दिल्ली को करीब 38.9 करोड़ गैलन पानी मिलता है। इसके अलावा मुनक नहर से भी हरियाणा रोजाना 750 क्यूसेक से अधिक पानी दिल्ली को भेजता है। यह पानी हैदरपुर, बवाना, नांगलोई और द्वारका वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाता है, जहां इसे साफ करके पीने योग्य बनाया जाता है।

यमुना नदी हरियाणा के दहिसरा गांव के पास से दिल्ली में प्रवेश करती है, और इसी इलाके को पल्ला गांव या पल्ला घाट कहा जाता है। यह इलाका दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर स्थित है। इसी स्थान पर पानी की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हुआ।
क्या यमुना का पानी वाकई दूषित है?
इस बात को साबित करने के लिए ही हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जब पल्ला घाट पहुंचे, तो उन्होंने न केवल यमुना का पानी पिया, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट भी पेश की। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा से जो पानी दिल्ली भेजा जा रहा है, उसमें कोई गंदगी नहीं है और यह पूरी तरह से पीने योग्य है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले चार सैंपल की जांच रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा बॉर्डर पर पानी पूरी तरह साफ और सुरक्षित पाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यमुना उनके लिए सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक है, और उसका जल पवित्र माना जाता है।

दिल्ली सरकार का पलटवार

दिल्ली की सीएम आतिशी ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 दिनों से हरियाणा के प्याऊ मनियारी क्षेत्र से डीडी-8 नाले के माध्यम से यमुना में दूषित पानी डाला जा रहा है। इससे पानी में अमोनिया और अन्य प्रदूषकों की मात्रा बढ़ गई है, जिससे दिल्लीवासियों को परेशानी हो रही है।

हालांकि इन सबके बीच दिल्ली जल बोर्ड की सीईओ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि सर्दियों के महीनों में, विशेष रूप से अक्टूबर से फरवरी के बीच, यमुना में अमोनिया का स्तर स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। हालांकि, दिल्ली के वाटर प्यूरीफिकेशन प्लांट 1 पीपीएम तक के अमोनिया को शुद्ध करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यदि अमोनिया का स्तर इससे अधिक हो जाता है, तो उसे अन्य जल स्रोतों जैसे दिल्ली सब ब्रांच और कैरियर लाइन चैनल से मिले पानी के साथ मिलाकर ट्रीट किया जाता है। यह कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि हर साल ऐसा होता है।

यमुना के पानी का यह विवाद राजनीतिक गलियारों में तूल पकड़ चुका है। बीजेपी ने इसे आम आदमी पार्टी की रणनीति बताया है, जबकि आप सरकार ने इसे हरियाणा सरकार की लापरवाही करार दिया है। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि दोनों सरकारों को एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय जल संकट का समाधान निकालने पर ध्यान देना चाहिए। जल विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान जल शुद्धिकरण और वितरण प्रणाली को सुधारने में ही निहित है। राजनीतिक खींचतान के बीच जनता के लिए वास्तविक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया है, जिससे आम लोगों को ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पानी की गुणवत्ता से जुड़ा यह विवाद अभी थमने वाला नहीं है। पल्ला गांव से यमुना का पानी सीधे दिल्ली तक पहुंचता है, लेकिन इस जल की गुणवत्ता को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और क्या नए मोड़ आते हैं।

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