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रेड जोन में पहुंचा दिल्ली का प्रदूषण लेवल... कई इलाकों में AQI 400 पार, हालात चिंताजनक
राजधानी दिल्ली की हवा फिर से जहरीली हो गई है. रविवार सुबह AQI 399 दर्ज किया गया जो रेड जोन में है. वजीरपुर, बुराड़ी और विवेक विहार जैसे इलाकों में प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया. CPCB के मुताबिक दिल्ली देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गई है. हवा में PM2.5 और PM10 का स्तर क्रमशः 338 और 503 तक पहुंच गया है. धीमी हवाओं और बारिश की कमी से प्रदूषण और बढ़ने की आशंका है.
Delhi AQI Update: देश की राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली होती जा रही है. प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है और स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अब दिल्ली रेड जोन में पहुंच चुकी है. रविवार की सुबह दर्ज किया गया वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 399 रहा, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है. विशेषज्ञों की मानें तो यह स्तर सेहत के लिए बेहद खतरनाक है और इससे सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
राजधानी की हवा में घुला जहर
दिल्ली में हवा का हाल इतना बुरा है कि हर सांस के साथ लोग जहर खींच रहे हैं. पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों ने मौजूदा स्थिति को लेकर चेतावनी दी है कि हवा में सांस लेना ऐसा है, मानो कोई व्यक्ति दिनभर में 9 से 10 सिगरेट पी रहा हो. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी का औसत AQI 361 दर्ज किया गया, जो इसे देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बना देता है. वजीरपुर में AQI 420, बुराड़ी में 418 और विवेक विहार में 411 दर्ज किया गया. इन इलाकों में प्रदूषण गंभीर श्रेणी में पहुंच चुका है. वहीं नोएडा में 354, ग्रेटर नोएडा में 336 और गाजियाबाद में 339 तक हवा का स्तर खतरनाक बताया गया है. एनसीआर के लगभग हर हिस्से में लोग जहरीली हवा से जूझ रहे हैं.
क्यों बढ़ रहा है प्रदूषण?
दिल्ली की हवा में लगातार बढ़ते PM2.5 और PM10 के स्तर ने हालात को और खराब कर दिया है. PM2.5 का स्तर 338 और PM10 का स्तर 503 तक पहुंच गया है. इसका मतलब है कि हवा में मौजूद बारीक धूल और प्रदूषक कण इतनी अधिक मात्रा में हैं कि वे फेफड़ों तक सीधे पहुंचकर नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके साथ ही इस समय दिल्ली में हवा की रफ्तार भी बेहद धीमी है. मौसम विभाग के मुताबिक रविवार को हवा 3 से 5 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलेगी. इतनी कम रफ्तार की वजह से प्रदूषक तत्व ऊपर नहीं उठ पाते और हवा में ही फंसे रहते हैं. यही कारण है कि हवा और जहरीली होती जा रही है. इस स्तर की हवा लंबे समय तक सांस लेने वालों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस या दिल की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. इसके साथ सुझाव दिया है कि लोग बिना ज़रूरत घर से बाहर न निकलें, मास्क का इस्तेमाल करें और सुबह-सुबह की सैर फिलहाल टाल दें.
मौसम साफ लेकिन धुंध बरकरार
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया है कि रविवार को दिन के समय मौसम साफ रहेगा, लेकिन सुबह और शाम हल्की धुंध छाई रहेगी. इस कारण दृश्यता यानी विज़िबिलिटी कम रहेगी. दोपहर के बाद धुंध थोड़ा कम हो सकती है, लेकिन प्रदूषण का असर पूरे दिन महसूस होगा. शाम होते-होते फिर से धुंध की परत शहर को घेर लेगी. मौसम विभाग ने साफ कहा है कि फिलहाल बारिश की कोई संभावना नहीं है. नवंबर में सामान्य तौर पर दिल्ली में 1 से 2 प्रतिशत बारिश होती है, लेकिन इस बार अब तक कोई वर्षा नहीं हुई. बारिश न होने की वजह से प्रदूषण कम होने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है.
ठंड ने दी दस्तक
दिल्ली में अब ठंड भी धीरे-धीरे बढ़ रही है. न्यूनतम तापमान 12 से 16 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है. हिमालय में हो रही बर्फबारी के कारण वहां से आने वाली ठंडी हवाएं राजधानी तक पहुंच रही हैं. इससे दिन में हल्की ठंड और रात में ठिठुरन बढ़ रही है. हालांकि, ठंडी हवा प्रदूषण को कुछ हद तक कम कर सकती थी, लेकिन धीमी गति की वजह से यह उम्मीद भी फिलहाल धुंध में खो गई है. जानकारों का मानना है कि दिवाली के बाद से ही दिल्ली और एनसीआर का प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ रहा है. पटाखों, पराली जलाने और ठंडी हवा के कारण हवा में जहरीले कणों की मात्रा तेजी से बढ़ी है. सामान्य तौर पर दिवाली के एक सप्ताह बाद प्रदूषण थोड़ा घटता है, लेकिन इस बार हालात अलग हैं. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, अभी अगले 15 दिन तक राहत की कोई उम्मीद नहीं है.
प्रशासन की तैयारियां
दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कई कदम उठाने की बात कही है. स्कूलों में छुट्टियों की अवधि बढ़ाई गई है और निर्माण कार्यों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है. कई जगहों पर पानी का छिड़काव और स्मॉग टावर का उपयोग जारी है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक हवा की दिशा और रफ्तार नहीं बदलेगी, तब तक प्रदूषण पर काबू पाना मुश्किल है.
बताते चलें कि दिल्ली की हवा फिलहाल किसी जहर से कम नहीं. हर सांस के साथ लोग अपने शरीर में प्रदूषक तत्व ले रहे हैं. आने वाले दिनों में मौसम थोड़ा ठंडा जरूर होगा, लेकिन जब तक बारिश नहीं होती या हवा की गति नहीं बढ़ती, तब तक राहत की उम्मीद बेहद कम है. राजधानी के लोगों को फिलहाल खुद को और अपने परिवार को इस जहरीली हवा से बचाने की जिम्मेदारी खुद ही उठानी होगी.
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