Vastu Tips: घर के मुख्य द्वार से जुड़े अहम नियम जो दूर कर सकते हैं वास्तु दोष

घर का मुख्य द्वार वास्तु शास्त्र में विशेष महत्व रखता है। यह न केवल घर में प्रवेश का स्थान होता है, बल्कि यह सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के आने-जाने का माध्यम भी बनता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार की दिशा, डिज़ाइन, और सजावट घर की सुख-समृद्धि को प्रभावित करती है।

घर का मुख्य द्वार केवल एक प्रवेश बिंदु नहीं होता, बल्कि इसे वास्तु शास्त्र में घर की समृद्धि, ऊर्जा और शांति का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह न केवल बाहरी ऊर्जा को अंदर आने देता है, बल्कि घर की सकारात्मकता को भी बनाए रखता है। यदि मुख्य द्वार वास्तु के अनुरूप न हो, तो यह कई तरह की समस्याएं खड़ी कर सकता है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि घर के मुख्य द्वार को वास्तु नियमों के अनुसार ही तैयार किया जाए। आइए जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार का निर्माण और रख-रखाव कैसा होना चाहिए।
मुख्य द्वार की दिशा और महत्व
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार की दिशा का खास महत्व होता है। उत्तर, पूर्व, या उत्तर-पूर्व दिशा में मुख्य द्वार होना सबसे शुभ माना जाता है। यह दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि को घर में लाती हैं। यदि मुख्य द्वार दक्षिण, पश्चिम, या दक्षिण-पश्चिम दिशा में हो, तो इसे दोषपूर्ण माना जाता है। इस स्थिति में वास्तु उपायों का सहारा लिया जा सकता है, जैसे दरवाजे पर विशेष रंगों का उपयोग या सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए तोरण और मंगल कलश का प्रयोग।
मुख्य द्वार का आकार और डिज़ाइन
मुख्य द्वार का आकार चौड़ा और ऊंचा होना चाहिए, ताकि ऊर्जा का प्रवाह बाधित न हो। द्वार संकीर्ण या बहुत छोटा होने पर घर में नकारात्मकता और वित्तीय समस्याएं आ सकती हैं। द्वार का डिज़ाइन भी सरल और सौम्य होना चाहिए। मुख्य द्वार पर देवी-देवताओं की मूर्ति या शुभ चिन्ह, जैसे स्वस्तिक और ॐ का चिन्ह लगाना बेहद शुभ माना जाता है।

मुख्य द्वार के सामने किसी भी प्रकार का अवरोध नहीं होना चाहिए। जैसे कचरा, जंगली पेड़, या टूटे हुए सामान। यह चीजें घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश कराती हैं। यदि मुख्य द्वार के सामने सीढ़ियां हैं, तो यह भी दोषपूर्ण मानी जाती हैं। इसे ठीक करने के लिए सीढ़ियों के नीचे पौधे लगाना शुभ माना जाता है। मुख्य द्वार की सामग्री मजबूत और टिकाऊ होनी चाहिए। लकड़ी का दरवाजा सबसे उत्तम माना जाता है, लेकिन धातु के दरवाजे भी उपयोग किए जा सकते हैं। दरवाजे का रंग हल्का और सौम्य होना चाहिए। गहरे और भड़कीले रंगों से बचना चाहिए, क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं।

इसके अलावा मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा और आकर्षक रखना चाहिए। यह न केवल घर में आने वालों पर अच्छा प्रभाव डालता है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। दरवाजे के पास लाइटिंग की व्यवस्था होना चाहिए, ताकि अंधेरे में भी यह आकर्षक और सुरक्षित लगे। रंग-बिरंगी बंदनवार और तोरण से सजाया हुआ मुख्य द्वार शुभता का प्रतीक माना जाता है।
मुख्य द्वार के अंदर और बाहर का माहौल
मुख्य द्वार के बाहर तुलसी का पौधा या छोटे-छोटे फूलों के गमले रखना शुभ माना जाता है। यह न केवल घर की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा को भी खींचते हैं। वहीं, मुख्य द्वार के अंदर सफाई और सुव्यवस्था का ध्यान रखना चाहिए। प्रवेश द्वार के पास जूते-चप्पल रखने से बचें, क्योंकि यह नकारात्मकता को जन्म देता है।
मुख्य द्वार से जुड़ी सावधानियां
मुख्य द्वार के पास किसी भी प्रकार की दरारें या टूट-फूट नहीं होनी चाहिए।
दरवाजे के ऊपर घड़ी या कैलेंडर लगाने से बचें।
द्वार को हर दिन साफ करें और नियमित रूप से उसकी मरम्मत करवाएं।
मुख्य द्वार के पास आईना लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह ऊर्जा को प्रतिबिंबित कर बाहर भेज सकता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मुख्य द्वार भगवान कुबेर और लक्ष्मी के घर में प्रवेश का द्वार होता है। यदि मुख्य द्वार वास्तु अनुरूप हो, तो यह धन और समृद्धि का आगमन सुनिश्चित करता है। वहीं, दोषपूर्ण मुख्य द्वार परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

घर का मुख्य द्वार केवल एक प्रवेश स्थान नहीं, बल्कि पूरे घर की उन्नति और शांति का आधार है। इसे वास्तु के अनुसार तैयार करना बेहद जरूरी है। सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए दिशा, डिज़ाइन, और सजावट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि मुख्य द्वार वास्तु दोषपूर्ण हो, तो तुरंत सुधारात्मक उपाय अपनाएं। सही मुख्य द्वार न केवल परिवार के सदस्यों के जीवन को सुखमय बनाता है, बल्कि घर में खुशहाली और समृद्धि का स्थायी वास भी सुनिश्चित करता है।

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