Advertisement
Lohri 2025: शादी के बाद पहली लोहड़ी? जानें क्या पहनें, क्या खाएं और क्या करने से बचें
लोहड़ी का पर्व उत्तर भारत में खासकर पंजाब और हरियाणा में धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार मकर संक्रांति से एक दिन पहले आता है और फसल कटाई की खुशी का प्रतीक है। लोहड़ी पर नवविवाहित जोड़ों के लिए यह दिन बेहद खास होता है। इसे जीवन की नई शुरुआत के रूप में देखा जाता है।
Follow Us:
लोहड़ी का पर्व उत्तर भारत में न केवल धूमधाम से मनाया जाता है, बल्कि यह एकता, उत्सव और परंपरा का प्रतीक भी है। हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाने वाला यह त्योहार खासतौर पर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन नवविवाहित जोड़ों के लिए लोहड़ी का महत्व और भी बढ़ जाता है। शादी के बाद पहली लोहड़ी का अनुभव जीवनभर यादगार रहता है, और इसे सही रीति-रिवाजों के साथ मनाना शुभ माना जाता है।
लोहड़ी का महत्व और परंपराएं
लोहड़ी का पर्व मुख्य रूप से फसल कटाई का उत्सव है। यह दिन किसानों के लिए नई ऊर्जा और समृद्धि का संदेश लेकर आता है। इस दिन लोहड़ी की आग के चारों ओर नाच-गान होता है और तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी जैसी चीजें आग में अर्पित की जाती हैं। मान्यता है कि यह भगवान अग्नि को अर्पण करने की प्रक्रिया है, जो सुख, समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद देती है।
नवविवाहित जोड़ों के लिए यह त्योहार और भी खास हो जाता है। इसे एक नए जीवन की शुरुआत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। लेकिन इस खुशी के अवसर को मनाते समय कुछ रीति-रिवाज और परंपराओं का पालन करना बेहद जरूरी है।
शादी के बाद पहली लोहड़ी: क्या करें, क्या न करें
1. काले कपड़े पहनने से बचें
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ अवसर पर काले कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है। यह रंग नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। शादी के बाद पहली लोहड़ी जैसे शुभ अवसर पर हल्के और चमकीले रंगों के कपड़े पहनना अच्छा माना जाता है। महिलाओं के लिए लाल, गुलाबी, या सुनहरे रंग पहनना शुभ होता है, जबकि पुरुष नए वस्त्र पहनकर इस दिन को खास बना सकते हैं।
2. 16 श्रृंगार करें
नवविवाहित महिलाओं के लिए लोहड़ी के दिन सोलह श्रृंगार करना विशेष महत्व रखता है। यह न केवल उनकी खुशी और उत्साह को प्रदर्शित करता है, बल्कि इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। शादी के बाद पहली लोहड़ी के दौरान दुल्हनें पारंपरिक पोशाक और आभूषण पहनकर त्योहार की रौनक बढ़ा सकती हैं।
3. जूते-चप्पल पहनकर परिक्रमा न करें
लोहड़ी की अग्नि की परिक्रमा एक महत्वपूर्ण परंपरा है। इसे करते समय ध्यान रखें कि जूते-चप्पल पहनकर परिक्रमा न करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करना अशुभ माना जाता है और इससे जीवन में समस्याएं आ सकती हैं। परिक्रमा के दौरान नंगे पैर रहना शुभ माना जाता है।
4. झूठा प्रसाद न चढ़ाएं
लोहड़ी की पूजा के दौरान तिल, रेवड़ी, गुड़ और पॉपकॉर्न जैसे प्रसाद अग्नि में अर्पित किए जाते हैं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि यह प्रसाद झूठा न हो। ऐसा करने से पूजा का महत्व कम हो सकता है।
5. मांसाहार और शराब से बचें
लोहड़ी का त्योहार पवित्रता और शुभता का प्रतीक है। इस दिन मांसाहार और शराब का सेवन करना अशुभ माना जाता है। खासतौर पर नवविवाहित जोड़ों के लिए यह परंपरा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
लोहड़ी की आग में तिल, गुड़ और रेवड़ी डालने का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसे शुभ माना जाता है और ऐसा करने से जीवन में खुशहाली और समृद्धि आती है। नवविवाहित जोड़ों को इस दिन बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए। यह आशीर्वाद उनके नए जीवन को खुशहाल और सुखद बनाने में सहायक होता है।
नवविवाहितों की पहली लोहड़ी
लोहड़ी का त्योहार अपने साथ उमंग, उत्साह और प्रेम का संदेश लेकर आता है। शादी के बाद पहली लोहड़ी नवविवाहित जोड़ों के लिए एक अनमोल अनुभव होता है। यह एक ऐसा मौका होता है, जब दोनों परिवार एकजुट होकर नए रिश्ते का स्वागत करते हैं। इस दिन को सही रीति-रिवाजों और परंपराओं के साथ मनाना न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जोड़ों के बीच के रिश्ते को और भी मजबूत बनाता है।
लोहड़ी का पर्व केवल उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में परंपराओं और रिश्तों की गहराई को दर्शाता है। नवविवाहित जोड़ों के लिए यह त्योहार एक नई शुरुआत और शुभता का प्रतीक है। इसलिए, लोहड़ी के इस पावन अवसर को सही रीति-रिवाजों और परंपराओं के साथ मनाएं, और इस दिन को अपने जीवन का सबसे खास दिन बनाएं।
लोहड़ी दी लख-लख वधाइयां!
Advertisement
यह भी पढ़ें
Advertisement