Pathway Global Alliance ने भारतीय Bloggers को Uzbekistan भेजा

आपको बता दें के PATHWAY GLOBAL ALLIANCE के Chairman Varun Kashyap जी और Deputy Director Udai Sood जी के नेतृत्व में देश के मशहूर ब्लोगर्स की टीम अपने टीम लीडर BJP Chandigarh Secretary Amandeep Singh जी के साथ उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुँची. मुझे भी इस डेलिगेशन का हिस्सा बनने का मौका मिला.

उज़्बेकिस्तान- सेंट्रल एशिया में बसा एक मुस्लिम लेकिन मॉडर्न देश है. उज़्बेकिस्तान की सीमा उत्तर में कजाकिस्तान, पूर्व में ताजिकिस्तान, दक्षिण में तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान से लगती है. उन्नीसवीं सदी में यह रूसी साम्राज्य और 1924 में सोवियत संघ का सदस्य हुआ करता था. 1991 में उज़्बेकिस्तान को सोवियत संघ से आजादी मिली और यह बन गया एक नया देश. 

भारत के मध्य एशिया देशों के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सम्बन्ध रहे है| देश में मुग़लो के समय में घोड़ो का आयात मध्य एशिया से ही किया जाता था| उज़्बेकिस्तान में फर्गाना, समरकंद, बुखारा आदि महत्वपूर्ण व्यापार के मार्ग थे, जो भारत के साथ- साथ यूरोप और चीन को जोड़ते थे जिसे कहा जाता था सिल्क रूट.

भारत और उज़्बेकिस्तान के राजनयिक सम्बन्ध की शुरुआत सोवियत संघ के विघटन के बाद से हुई| हमारे देश के कई प्रधानमंत्री इस देश का दौरा कर चुके हैं. प्रधानमंत्री मोदी जी भी यहाँ जा चुके हैं और अब यह दोनो देश आपस में व्यापार के साथ साथ टुरिज़म में बढ़ोतरी भी चाहते हैं और इसी मुहिम के तहत PATHWAY GLOBAL ALLIANCE द्वारा भारत के कुछ चुनिंदा मशहूर बलोगर्स की टीम को उज़्बेकिस्तान भेजा गया.

आपको बता दें के PATHWAY GLOBAL ALLIANCE के Chairman Varun Kashyap जी और Deputy Director Udai Sood जी के नेतृत्व में देश के मशहूर ब्लोगर्स की टीम अपने टीम लीडर BJP Chandigarh Secretary Amandeep Singh जी के साथ उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुँची. मुझे भी इस डेलिगेशन का हिस्सा बनने का मौका मिला. ब्लोगर्स की इस टीम को उज़्बेकिस्तान के मशहूर शहर जैसे की बुखारा, समरकंद, ताशकंद जैसे मुख्य शहरों में ले जाया गया और वहाँ की संस्कृति, खाना, पहनावा, इतिहास से परिचित कराया गया.

ताशकंद पहुँचने के बाद उज़्बेकिस्तान की फास्ट बुलेट ट्रेन से हम सभी को बुखारा शहर ले जाया गया जहाँ हमने पौराणिक काल के कई अजूबे देखे. क्या आप जानते हैं के रेशम मार्ग पर स्थित बुखारा का ऐतिहासिक केंद्र दो हज़ार साल से भी ज्यादा पुराना है. यह 10वीं से 17वीं सदी के मध्य एशिया के बेहतरीन संरक्षित इस्लामी शहरों में से एक है, जिसका शहरी ताना-बाना काफ़ी हद तक आज भी बरकरार है और आज यह शहर UNESCO WORLD HERITAGE SITE का हिस्सा है. यहाँ की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभावों को देखने के लिए आपको यहाँ मस्जिदों, मदरसों, गुंबदों और मीनारों को देखना चाहिए. 

उसके बाद हमें AFROSIYOB TRAIN से बुखारा से समरकंद लाया गया जो की दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है. यहाँ भी WORLD HERITAGE SITE मौजूद हैं. यहां हमें प्रसिद्ध रेगिस्तान स्क्वायर और उसके आस-पास के मदरसों, मीनारों में ले जाया गया और हमने सियाब बाज़ार में कई सूखे मेवे और मिठाइयाँ भी खाईं. यहाँ आप चाहे तो ड्राई फ़्रूट्स, लोकल कला, कपड़ों, फलों की शॉपिंग भी कर सकते हैं. यहाँ के लोगों में BOLLYWOOD और ख़ास तौर पर AMITABH BACHCHAN, SHAHRUKH KHAN, MITHUN CHAKRABORTY का बहुत क्रेज़ है. इन लोगों को INDIA हमारे कलाकारों के गानों से याद है और कई लोग तो हमें INDIA का जान कर मुफ़्त में नाश्ता भी करा रहे थे. इससे मालूम हुआ के दोनो देशों के लोग आपस में एक दूसरे के लिए प्रेम भाव रखते हैं. 

उज़्बेक में हाथों से तैयार की गई हर चीज़ में बारीकी से विवरण होता है. आज भी, उज़्बेकिस्तान के कुशल कारीगर रेशमी कपड़ा बुनने, मिट्टी के बर्तन बनाने, आभूषण बनाने, लकड़ी पर नक्काशी करने, पेंटिंग, नक्काशी करने, कालीन बुनने, चमड़े, लाख और किताबों पर लघु चित्र बनाने, सोने की रंगाई करने, कढ़ाई करने और लोहार के काम करने की समय-परीक्षित परंपराओं को जारी रखे हुए हैं. उज़्बेकिस्तान का मशहूर और प्राचीन समय से बना आ रहा समरकंद पेपर किस तरह से बनाया जाता है यह कला भी हमें वहाँ दिखाई गई. और क्या आप जानते हैं के इस ख़ास तौर से बनाए गए समरकंद पेपर की उम्र हज़ारों साल होती है. इस कागज़ के टुकड़े को नष्ट करना इतना आसान नहीं हैं. 

वहाँ जाके मुझे इस बात का भी अहसास हुआ के बुखारा, समरकंद जैसे प्राचीन शहर की झलकियाँ हमारे देश भारत से काफ़ी मिलती जुलती हैं. और मिलेंगे भी क्यूँ नहीं क्योंकि दोनो देशों का इतिहास आपस में काफी हद तक जुड़ा हुआ है. लेकिन इतिहास को छोड़कर आज ये दोनों देश आपस में दोस्ती, कारोबार, विश्वास, कायम करना चाहते हैं. उज़्बेकिस्तान की परंपरा वहाँ के  संगीत, नृत्य, पेंटिंग, लागू कलाएँ, भाषा, व्यंजन और कपड़ों में आज भी साफ़ झलकती है. 

इसके अलावा हमने ताशकंद शहर घुमा जो की माडर्निज़म का नमूना है. यहाँ की मैजिक सिटी डिज़्नीलैंड की तरह ही लगेगी और इस शहर में आपको कोई कमी महसूस नहीं होगी. यहाँ की जनता माडर्न भी है और रात के समय आपको यहाँ नाइट कल्चर भी देखने को मिलेगा. ताशकंद से कुछ घंटा दूर पहाड़ों में AMIRSOY भी हमें ले जाया गया जहाँ की CABLE CAR आपको हमारे गुलमर्ग की याद दिलाएगा. सर्दियों में यहाँ SKIING के लिए लोग दूसरे देशों से आते हैं. उसके बाद हमने यहाँ CHARVAK LAKE भी देखी जो हमारे देश की TEHRI LAKE जैसी ही है. यहाँ भी DAM बनाया गया है और बहुत ही सुंदर दृश्य आपको यहाँ देखने को मिलेंगे.

उज्बेकिस्तान आम तौर पर पर्यटकों के लिए एक बहुत ही सुरक्षित देश है. अफ़गानिस्तान के साथ सीमा साझा करने के बावजूद, यहाँ धार्मिक चरमपंथ बहुत कम है और विदेशियों के खिलाफ़ अपराध दुर्लभ हैं. भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच मेडिकल टूरिज्म की मांग में भी समय के साथ साथ काफ़ी वृद्धि हुई है|  भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच कम दूरी के कारण से भारत उज़्बेकिस्तान के मरीजों के लिए एक व्यवहार्य चिकित्सा पर्यटन स्थल भी बनता जा रहा है| साथ ही साथ हमारे देश से कई बच्चे रूस के अलावा वहाँ भी मेडिकल की पढ़ाई भी करने जाते हैं. 

क्या आप जानते हैं के यह वही मुल्क है जहाँ हमारे देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने अपनी अंतिम सांस ली थी जब वह पाकिस्तान के साथ ताशकंद एग्रीमेंट साइन करने वहाँ गए हुए थे . 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध के बाद, दोनों देशों के बीच शांति समझौते के लिए दोनों देशों में उज़्बेकिस्तान के ताशकंद में बातचीत हुई थी. 10 जनवरी, 1966 में ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, 11 जनवरी, 1966 को, शास्त्री जी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन हो गया. ताशकंद में ही शास्त्री जी के सम्मान में एक स्मारक, रोड, स्कूल, म्यूज़ीयम भी बनाया गया है. 

प्राचीन रेशम मार्ग तथा मुग़ल सम्राज्य के समय से ही भारत और उज़्बेकिस्तान द्विपक्षीय संबंधो को निभाते आ रहे  है| उज़्बेकिस्तान भारत का मित्र रहा है इसलिए इस क्षेत्र के साथ भारत के सम्पर्क और भारत की  मध्य एशिया सम्पर्क नीति में इस देश को प्रथमिकता दी जाती है|  दोनों देश आपसी सहयोग से राजनीतिक, वाणिज्यिक और सांस्कृतिक संबंधो को मजबूत कर रहे है | इस देश की करेन्सी भारत के रुपए के आगे बहुत कमज़ोर है इसलिए भारतीय यहाँ कम पैसों में भी काफ़ी आनंद उठा सकते हैं. यहाँ का VISA भी आसानी से मिल जाता है और फ़्लाइट टिकट भी बहुत महँगी नहीं हैं. यह देश हमारे यहाँ से लगभग तीन-चार घंटे की दूरी पर है. तो अगली बार आपको सस्ते में विदेश घूमने का मन करे तो आप उज़्बेकिस्तान घूमने जा सकते हैं. यहाँ से चाहे तो ड्राई फ़्रूट्स, इनके मशहूर फल साथ वापस ला सकते हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें

Advertisement

LIVE
अधिक →